सोमवार, 1 फ़रवरी 2016

tanu thadani तनु थदानी ग़ज़ल

डरे सब कैमरे से ; रब से क्यूं न डरता है यारों !
अगर तुम मानते रब को ; वो देखा करता है यारों !


कि जिस रब ने हमें बुद्धि दी ; दुनियां खूबसूरत दी ;
क्यूं उसकी चापलूसी में ;मारता ; मरता है यारों  ?


तुम्हारे धर्म की पुस्तक ; सभी छलनी है सुंदर सी ;
यही सच है तो खुशियाँ ; क्यूं उसी से भरता है यारों ?


सफर तो पूछ लेते हैं ; हम हाथों की लकीरों से ;
मगर रस्ता तो खुद ही को ; बनाना पड़ता है यारों !
--------------------------- तनु थदानी

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