बुधवार, 20 जनवरी 2016

tanu thadani तनु थदानी आखिर वो अपना बेटा है


ईश्वर जब से इन आँखों में ; इक खुशी दिखाना भूल गया !
बेटे से गिला नहीं ; वो तो बस ; चश्मा लाना भूल गया !


यूं तो है भुलक्कड़ नहीं मगर ; वो जाने कैसे भूल गया ;
मेरा बेटा ; घर में मेरा ; कमरा बनवाना भूल गया !


इक पिता ने मुझे बताया कि ; बेटे ने खूब तरक्की की ;
हर हफ्ते फोन तो है करता ; पर आना जाना भूल गया !


हम जीवन मसले दर्द रिसे ; हम बूढ़े कर भी सकते क्या ;
जो गोद में खा कर बड़ा हुआ ; वो हमें खिलाना भूल गया !


घर के आंगन की इक खटिया ; इक छड़ी व छाता इक लुंगी ;
इतनी सी दुनियां के आगे का ; तानाबाना भूल गया !


पोते के जनम की ख़बर न दी : नाराज क्यूं होती बेटे पर ;
बेटे ने कहा तो होगा पर ; मैं ही ये बताना भूल गया !


चल माफ उसे कर देते हैं ; आखिर वो अपना बेटा है ;
हम में ही होगी कमी ; जो हमको ; गले लगाना भूल गया !
-------------------------- तनु थदानी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें