मंगलवार, 14 जून 2016

Tanu thadani तनु थदानी हिन्दुस्तान से प्यार करें

हिन्दुस्तान से प्यार करें
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बेशक़ हम व्यापार करें , झगड़े भी हर बार करें ;
मगर जरुरी है ये भी कि , हिन्दुस्तान से प्यार करें !


कहीं मराठी,कहीं बंगाली,कहीं पंजाबी,तमिल मिला ;
खुद को हिन्दुस्तानी बोलें ; ये भी क्या सरकार करे ?


अगड़ा पिछड़ा पंडित मुस्लिम, दलित वगैरह भरे पड़े ;
बन के हिन्दुस्तानी ; चल ; नेताओं को बेकार करें !


कोई गौ को माँ बतलाये ;कोई उसको काट चिढ़ाये ;
कोई चाकू दो तरफों से ;टोपी पहन के धार करे !


राम जी बोले अरे मोहम्मद ; हमने ये क्या कर डाला ;
इंसा में पशुता भर आयी ; कैसे; चलो विचार करें !


कहा मोहम्मद साहब ने कि ; किसको राह दिखाओगे ?
आँख सलामत वाले ही जब ;अंधों सा व्यवहार करें !


एक थदानी बोल रहा ; तुम सारे हिन्दुस्तानी हो ;
सबका एक तिरंगा है बस ; हिन्दुस्तान से प्यार करें !!
----------------------------- तनु थदानी







शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

Tanu thadani तनु थदानी हूँ बूँद बूँद सा बिखरा मैं

ये कौन हमारे आगे पीछे ; ग़म के पत्थर पटक गया ?
शायद अपना ही अंतस था ; कुछ कुछ ऐसा ही खटक गया !


इतने सारे सत्संग चलते ; अजान नमाज़ में व्यस्त सभी ;
फिर भी देखो हर इक चेहरा ; हर इक ख्वाहिश पे चटक गया !


सपनों के चप्पे चप्पे पर ; हम रूप बदल कर चिपके हैं ;
सपनों की बस्ती चकाचौंध ; जो गया वो रस्ता भटक गया !


इक होता है एकांत जो अपनी ; बाहों में भर लेता है ;
है होता एक अकेलापन ; जो फंसा वहीं पे लटक गया!


हूँ बूंद बूंद सा बिखरा मैं ; अपनी ही हर अभिव्यक्ति पर ;
आवाज की सरहद लांघ के जब ; रोया ;ग़ज़लों में अटक गया !
------------------------------ तनु थदानी

सोमवार, 1 फ़रवरी 2016

tanu thadani तनु थदानी ग़ज़ल

डरे सब कैमरे से ; रब से क्यूं न डरता है यारों !
अगर तुम मानते रब को ; वो देखा करता है यारों !


कि जिस रब ने हमें बुद्धि दी ; दुनियां खूबसूरत दी ;
क्यूं उसकी चापलूसी में ;मारता ; मरता है यारों  ?


तुम्हारे धर्म की पुस्तक ; सभी छलनी है सुंदर सी ;
यही सच है तो खुशियाँ ; क्यूं उसी से भरता है यारों ?


सफर तो पूछ लेते हैं ; हम हाथों की लकीरों से ;
मगर रस्ता तो खुद ही को ; बनाना पड़ता है यारों !
--------------------------- तनु थदानी

रविवार, 31 जनवरी 2016

tanu thadani तनु थदानी सजा होगी कि हम लाचारगी बच्चों की देखेंगे

न ये हिन्दू ; न ये मुस्लिम ; कभी भी बाज आयेंगे !
मरेंगे कुत्तों की भाँति ; ये क्या इलाज पायेंगे ?




बहत्तर हूर न होंगी ; न होंगी अप्सरा कोई ;
वहाँ इक शून्य होगा ; मंत्र न नमाज पायेंगे !




महज़ तुमको डराने को ;बना डंडा है ये ईश्वर ;
करो ये प्रण कि बिन डंडे का ; इक समाज लायेंगे !




तुम्हारे बाद की पीढ़ी हो मुक्त ; श्रेष्ठ के दंभ से ;
हमारे श्रेष्ठ ये मुमकिन ; बना क्या आज पायेंगे ?


जो हम सब गाय सुअर ; लाउडस्पीकर ; में रहे उलझे ;
तो हम बच्चों की मुस्कानों में ; खुजली खाज पायेंगे !




सजा होगी कि हम लाचारगी ; बच्चों की देखेंगे ;
जिन्हें हर सांस में हम ; धर्म का ; मोहताज पायेंगे !
------------------------ तनु थदानी



गुरुवार, 21 जनवरी 2016

tanu thadani तनु थदानी देर तलक

किसी की शक्ल पे नज़रें फंसी थी;देर तलक !
वफा के नाम पर रस्साकशी थी ; देर तलक !






मैं उसके जिस्म से गुजरा ;मगर इक रूह न मिली ;
वो मेरी इस शिकायत पे हंसी थी ; देर तलक !






भले गंवार मैं साबित हुआ ; अफसोस नहीं ;
जो मुझमें भोली सी उमर बची थी; देर तलक !




जो बूढ़ी माँ की हथेली घुली ;आशीष दे दे ;
वो माँ की लोरियां ;मुझमें बसी थीं; देर तलक !




 























बुधवार, 20 जनवरी 2016

tanu thadani तनु थदानी आखिर वो अपना बेटा है


ईश्वर जब से इन आँखों में ; इक खुशी दिखाना भूल गया !
बेटे से गिला नहीं ; वो तो बस ; चश्मा लाना भूल गया !


यूं तो है भुलक्कड़ नहीं मगर ; वो जाने कैसे भूल गया ;
मेरा बेटा ; घर में मेरा ; कमरा बनवाना भूल गया !


इक पिता ने मुझे बताया कि ; बेटे ने खूब तरक्की की ;
हर हफ्ते फोन तो है करता ; पर आना जाना भूल गया !


हम जीवन मसले दर्द रिसे ; हम बूढ़े कर भी सकते क्या ;
जो गोद में खा कर बड़ा हुआ ; वो हमें खिलाना भूल गया !


घर के आंगन की इक खटिया ; इक छड़ी व छाता इक लुंगी ;
इतनी सी दुनियां के आगे का ; तानाबाना भूल गया !


पोते के जनम की ख़बर न दी : नाराज क्यूं होती बेटे पर ;
बेटे ने कहा तो होगा पर ; मैं ही ये बताना भूल गया !


चल माफ उसे कर देते हैं ; आखिर वो अपना बेटा है ;
हम में ही होगी कमी ; जो हमको ; गले लगाना भूल गया !
-------------------------- तनु थदानी

शुक्रवार, 15 जनवरी 2016

tanu thadani तनु थदानी क्यूं है

चलन में बदचलन का; आचरण; होता क्यूं है ?
किया जो माफ उसे; फिर भला ; रोता क्यूं है ?




कभी न पूछना कि;प्यार से; हासिल क्या हुआ;
वफा की लाश को ; ताउम्र ; संजोता क्यूं है ?




वो जिसने सुख के लिये;जिस्म की;तौहीन कर दी;
उन सूखी राहतों में ; प्यार को ; ढ़ोता क्यूं है ?




यही है दुनियां ; सभी शक्ल पे ; नकाब चढ़ी ;
भला दिन रात फिर;अफसोस को;बोता क्यूं है?


वो जिसने ; साथ निभाने की कही; जन्मों तक;
वो मेरी आँखों में; सुईयों को; चुभोता क्यूं है ?


सभी हैं कहते कि;भगवान है;हर शै में बसा ;
भला फिर जिस्म से ; ईमान ये ; खोता क्यूं है ?