शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी अच्छा नहीं लगता

कोई मारे या कि हत्या करे , अच्छा नहीं लगता !
करे  कोई  और  कोई  भरे , अच्छा नहीं लगता !

मेरे  चाचा  को  सांप पालने  का , शौंक चर्राया ,
विष  से मेरे  बेटे  मरे , अच्छा  नहीं  लगता !

मेरी  किताब  में  फरमान  है  जो कत्ल करने का ,
खुदा का बोल कर के जो पढ़े,अच्छा नहीं लगता !

हजारों आयतों में फांस कर, हमको फंसाया है ,
किया इंसान से हमको परे , अच्छा नहीं लगता !

मेरे अब्बू मेरी अम्मी , मेरे शिक्षक भी अल्लाह हैं ,
अल्लाह एक है इस पर लड़े , अच्छा नहीं लगता !


शुक्रवार, 12 दिसंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी बुरी खबर है

आदमी बन  के जी रहें थे ,मगर क्या ये हो गया ?
हमें हिन्दू - मुसलमां कर के हमें, कौन धो गया ??

मेरे परिवार का मसला था कि,अम्मी कहूँ या माँ ,
मगर नेता वो हिन्दी उर्दू का,मसला क्यूँ बो गया ?

मैं अपनी भूख के मुद्दे पे न,सो पाया पिछली रात ,
वो मेरा सांसद संसद में जा के, कैसे सो गया ?

यहां इसाईयत हिन्दू मुसलमां , सब सलामत है ,
बुरी खबर है इनकी भीड़ में , भारत ही खो गया !
-------------------------- तनु थदानी



रविवार, 7 दिसंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी गरं बिक गयें इक बार

गरं बिक गयें इक बार

जो हो न सका मुल्क का , वो भार ही होगा !
धरती का बोझ, धर्म का ,  विकार ही होगा !

हिन्दुत्व ओं इस्लाम तो , नफरत के जखीरे ,
भारत से जो हो प्यार तो,वो प्यार ही होगा !

तुम  लड़  रहे  भगवान के ,मकान  के  लिये ,
यूं  ही  नहीं ,ये भी तो इक,व्यापार ही होगा !

अल्लाह हमारी नस्ल का,ईश्वर तुम्हारी नस्ल,
जो  बोलता ये , अक्ल से , बीमार  ही  होगा !
                                 
काबा  में  मिले  राम  ,  बुतखाने  में  अल्लाह,
बचपन से गरं  पढ़े तो , खुदा  द्वार  ही  होगा !

जब  बैठ  भाई   संग  ,  खाओगे  खुशी  से ,
तुम  देखना  माँ  की  नज़र में,लाड़  ही  होगा !

मज़हब  की  दूकानो मे रखी , चीज नहीं हम,
गरं  बिक गयें इक बार तो , हर बार ही होगा !
                                   ------ तनु थदानी

शुक्रवार, 5 दिसंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी पैसे क्यूँ कमाते हैं

दरअसल होता यूं है , जब भी हम,पैसे कमाते हैं !
महज़ पैसे  कमा , इज्जत  कमाना , भूल जाते हैं !

हमें बिलकुल न भाती गंदगी ,कचरे की ये दुनियां,
तभी तो खिड़कीयों पे , मोटा सा ,पर्दा लगाते हैं !

खुदा ने बख्शी है खुशबू ,हवा पानी की नेमत जो ,
हम बोतल बंद  में , उन नेमतों  को , बेच आते हैं !

कभी सच सुनना हो मुझसे,तो ठेके आ के ही मिलना,
सभी कहते हैं दारू पी के ही , सच  बड़बड़ाते हैं !

हमारी  दोस्ती  दो  पैग  से , बनती  बिगड़ती  है ,
तभी तो  जिंदगी भर,  जिंदगी को , छटपटाते  हैं !

तेरी जीने की खातिर,  की गई,  चालाकियां प्रपंच,
तुम्हें बस दुःख में ही रहना , तेरी फितरत बताते हैं !

कभी  कब्रों  के  पास  बैठना , औकात  जानोगे ,
बनाते  हैं महल  लेकिन,वही  छे फुट ही  पाते  हैं !

यहाँ  पे  मौत पे  रोना , महज़ इक  रस्म  है  बंधु ,
ओं सीना तान के , हम  आदमी  हैं , ये बताते  हैं !

मेरी ग़ज़लों ने जिसको भी किया ,नंगा, पलट कर के ,
मैं हूं उन जैसा ही , ये कह के वो , दर्पण दिखाते हैं !

हमें  क्या  नींद- चैन- शांति , पैसों  से  मिलती  है ?
समझ में ये  नहीं  आता , कि  पैसे  क्यूँ  कमाते  हैं ??

बुधवार, 3 दिसंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी गज़ब हैं लोग सियासी

मैं मंदिर तोड़ आऊंगा , तुम मस्जिद तोड़ कर आना !
मैं  ईश्वर  छोड़  बैठा  हूँ , खुदा तुम छोड़ कर आना !

तभी  होगी  हमारी   दोस्ती , जब  भारतीय   होंगे ,
मैं पापा को मनाऊंगा , तुम अब्बू को भी समझाना !

क्यूँ  हमने  चाँद-  बकरे -रंग -टोपी , बाँट डाले  हैं ,
चलो  मैं गाऊं  कव्वाली , भजन तुम भी जरा गाना !

गज़ब  हैं लोग  सियासी , कि जो ज़ज्बात से खेलें,
हम  ही  हैं  शाह, नेताओं  ने  पर, प्यादा हमें माना !

चलो  इनकी  दूकाने  तोड़  , वंदे  मातरम्   बोलें ,
जहाँ  ये  बेचते  हमको  बना  के , धर्म  का दाना !

फ़कत  रस्मों  रिवाजों  ने , हमें  दुश्मन  बनाया  है ,
नहीं तो माँ भी घर में इक सी है ,ओं इक सा है खाना !

महज़ हम भारतीय हो कर जीयें , तो भी सुखी होंगे ,
जरूरी  है  नही  हिन्दुत्व  या , इस्लाम  अपनाना !

शनिवार, 29 नवंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी हर साल ही बाबा मुझे तुम घर बुलाओ ना

हूँ जी रही मैं ,खुश हूँ ये ,जिस तिस से कहला के !
क्यूँ  कर  दिया  परदेसी ,बाबा ,दुनियां में ला के ?

हम  बेटियों  का  ही  पता ,क्यूँ  कर  बदलता है ?
दुनियां  बदल  जाती  हमारी , पीहर  से  जा  के !

थे  रुठते  जो  घर  में  ,  हर   कोई  मनाता  था ,
ससुराल  में  तो हक़ नहीं , रुठे  भी  दिखला  के !

आयी  जो  बरसों बाद  मैं , तो सब  लिपट रोयें ,
मैं हँस रही थी , अपने  रोते  दिल को बहला के !

बस रो लिया ,मुस्का  लिया ,वो कुछ नहीं बोला ,
बाबुल ने प्यार कर लिया , बालों को सहला  के !

हर साल  ही  बाबा  मुझे  तुम, घर  बुलाओ  ना ,
भर  दूँगी घर बचपन से  मैं , हर साल यूँ आ के !

शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी चलो तुम्हें जन्नत दिखलाऊं

जिस दिन ग़ज़लें मेरी तुमको , एक चिकोटी काटेगी !
दुनियां से तब अलग दिखोगे , मौन तुम्हारा छांटेगी !

पहले इंसा बन जाओ,फिर हिन्दू-मुस्लिम बन जाना ,
अच्छी फितरत ही खुशियों से , रूह तुम्हारी पाटेगी !

भले पकाओ विष जीवन भर, याद रखो संतान तेरी ,
तय  है  जो भी  पका  मिलेगा , खायेगी  व  चाटेगी !

झरने - पंक्षी  सुर  को बांटे , हवा बाँटती  जीवन  है ,
जिस दिन हो  जाओगे  इनके , खुशी तुम्हें ये बांटेगी !

चलो  तुम्हें  जन्नत  दिखलाऊं , जो  तेरे ही घर में है ,
जन्नत वो ,जब दुःख आयेगा , तुम्हें हौंसला माँ देगी !

गुरुवार, 27 नवंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी मुझे दंगा नहीं देना .

रहो खुश तुमको मैं इस मुल्क का ,राजा बनाता हूँ !
मुझे  दंगा  नहीं  देना , मैं  ये  झोली   फैलाता  हूँ !

यहाँ लायसेंस ले कर मौत का , व्यापार होता है ,
तहत कानून ये  ज़ायज, तभी मैं  तिलमिलाता हूँ !

मेरे घर के निकट, बाहर सड़क पे , दो दो ठेके हैं ,
मगर मैं दूध की खातिर तो , अगले चौक जाता हूँ !

महज़ घर गाँव का  छोड़ा , यहाँ पे ये सजा पायी ,
वहाँ साइकिल चलाता था , यहाँ रिक्शा चलाता हूँ !

शहर की गली सड़को ने , मुझे जबरन बड़ा किया ,
मैं घर में माँ के संग, मासूमियत में , लौट आता हूँ !

मुझे  उल्लु  कभी  ईनाम  क्यों , देंगे भला  बोलो ?
जहां  भी  दिखता अंधेरा , वहीं  दीपक जलाता हूँ !

न मीठी बात है , न लोरियां , न किस्से परियों के ,
कहीं तुम सो न जाओ, इसलिए ग़ज़लें सुनाता हूँ !

सोमवार, 24 नवंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी सियासत siyasat

सियासत अब यहाँ हिंसा को ही ,जुबान देती है !
मुझे हिंदू , तुझे मुस्लिम, यही  पहचान  देती  है !

सियासत ने हमारी शक्ल को ,इक वोट में बदला ,
चुनाव  में  तो हर ज़मीर  तक को , छान देती है !

सियासत होती है कि क्या पढ़े,क्या ना पढ़े बच्चे ,
सियासत  ही  यहाँ  स्कूल  में  , दूकान  देती  है !

कमाने  क्यूँ  निकल जाते  हैं  बच्चे , ये नहीं मुद्दा ,
सियासत बाल -मजदूरी पे बस,  फरमान देती है !

हमारी  किस  तरह  से  काटनी  है , जेब व गर्दन,
सियासत इक तवायफ की तरह,सब जान लेती है !

कवि जब खोलता है पोल, नेता की , सियासत की ,
सियासत इक सियासत की तहत,  सम्मान देती है !

कि जैसे  काटते  कुत्ते को , हड्डी  हम  खिलाते हैं ,
सियासत  एक  पदवी ,  इक दुशाला , दान देती है !

सोमवार, 17 नवंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी कर लिया फतह सुनो जी

हम सलीके आदमी , मिल भी पायेंगे कहाँ ?
डालते हैं डाका तक, कर के पूजा हम यहाँ !

चालाकियां,चालाकियां,चालाकियां,चालाकियां,
कर रहें कदमों से ले , सांस तक यहाँ वहाँ !

है अगर भगवान तो भी,क्या करेगा वो भला ,
लूटते  हैं  देश  को  चल , कौन देखेगा यहाँ ?

एक फ्लैट ,  एक गाड़ी ,  बाप  वृद्धाआश्रम  ,
कर लिया फतह सुनो जी,इस तरह सारा जहाँ !

रविवार, 16 नवंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी मुझे ग़ज़लों की नज़र से ही पहचाना करो.

तुझे बस आईना दिखलाया , इतना खीज नहीं !
दिखेगी  भी  नहीं , गंर, तन पे है , कमीज नहीं !

मुझे  ग़ज़लों  की  नज़र  से ही , पहचाना  करो ,
कि  मैं  शक्ल  से , पहचान  वाली  चीज  नहीं !

किसी की  फिक्र में मिलता हूँ , खुशनसीबी मेरी ,
किसी भी  जिक्र  में रहने  की  ,है  तमीज  नहीं !

वो रोया , आँखें   मेरी , आंसुओं  से  भर  आई  ,
उसी  पे  ग़ज़ल  लिखूं  , इतना  बदतमीज  नहीं !

tanu thadani तनु थदानी चलो इक बार जी के देखते हैं फूल की भाँति


शनिवार, 8 नवंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी बस बात इतनी सी थी

आते  ही  धर्म  थामा , यूं  कमजोर आयें हम!
फिर जातियों को नाम तक में,जोड़ आयें हम!

गानों में भी हिन्दू भजन, मुस्लिम कव्वालियां ,
सुर तक में भी जाति, ओं धर्म ओढ़ आयें हम!

बगिया के फूल थे जीवित,पत्थर तो थे निर्जीव,
उन पत्थरों के खातिर  , फूल तोड़ आयें हम!

ईश्वर  बड़ा  दयालु  तो , हथियार हाथ क्यूँ ?
हर देवता संग शस्त्र तो,किस ओर आयें हम?

बाबू जी  रहें  उम्र  भर  , खिलाफ  पंडो  के ,
पर श्राद्ध में पंडो से , रिश्ता जोड़ आयें हम!

बेहद अजीज दोस्त था पर,था वो मुसलमान,
बस बात इतनी सी थी,दोस्त छोड़ आयें हम! 

बुधवार, 5 नवंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी गद्दी छोड़ो ओ राजा जी

हम लिखते,दुःख की कविताएँ ,उनसे पूछो दुःख के माने !
जिन बच्चों ने, ओढ़ गरीबी , सपने अपने दुःख से साने !

मायूसी  के  बीहड़  वाले , बच्चों  में  मुस्कान  कहाँ  है ?
धूप  ठंड  और भूख के देखो , उलझ गयें सब ताने बाने !

कचरा बीने , ईटें ढ़ोये , बचपन  आखिर  कितना  रोये ?
देश  हमारा  चला  रहें   हैं , अंधों  में  जो  राजा   काने !

बच्चों  के  लब  खिलने  वाली , हँसी  हमारी पूंजी है जी ,
वही नहीं गंर देश में बोलो , रुपये - डाॅलर  के क्या माने !

फुटपाथ  पे  पलता  बचपन , देश  के भावी  कर्णधार हैं ,
उन तक तो न पहुँच सके पर,  लगे चाँद पर आने - जाने !

बाल- मजूरी वाला चिंतन  , होटल  पांच सितारा में क्यूँ ?
गद्दी  छोड़ो  ओ  राजा  जी ,  नहीं   चलेंगे  और  बहाने !

रविवार, 2 नवंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी पता ठिकाना भूल गयें हैं

तुमको रोता देख के रोयें , ऐसा हमने प्यार बनाया !
तुम बिन जी पायेंगे कैसे , चुप्पी का जुगाड़  बनाया !

साथ चलो गंर आँख मूंद भी,नहीं गिरोगी संग मेरे तू ,
आस का घर तुमसे जब टूटा,हमने ही हर बार बनाया!

प्यार करूँगा बदले इसके ,प्यार ही माँगू शर्त नहीं ये ,
नहीं वो होगा प्रेमी जिसने ,चाहत को व्यापार बनाया !

सांसो की औकात नहीं कि,नाम वो तेरा भूल के आये ,
जिन सांसो में नाम न तेरा, उनसे न व्यवहार बनाया !

नहीं चाहिये  शहर चमकता ,नहीं चाहिये लोग पराये ,
हम-तुम जितना ही अब मैंने ,छोटा सा संसार बनाया !

पता ठिकाना भूल गये हैं ,अब तो तेरे ख्याल में रहते ,
ईंट के घर में पता नहीं है , कौन गया है कौन है आया !


मंगलवार, 28 अक्तूबर 2014

tanu thadani तनु थदानी भारत बड़ा खुश है

घमंडी हूँ , है रूआब कि , भारत बड़ा खुश है !
हर  शै  में आफताब कि , भारत बड़ा खुश है !

सीमा  पे  मुझे  सोते , नहीं  आप   देखोगे ,
पर देखता हूँ ख्वाब कि , भारत बड़ा खुश है !

बे - फिक्र होली खेलो , दिवाली मनाओ जी ,
चाहत यही जनाब कि , भारत बड़ा खुश है !

माँ  खुद  ने  दी जुराब, बोली डगमगाना ना ,
पैरों  में  वो जुराब कि , भारत बड़ा खुश है !

सीमा  पे  आ  के  पूछते , हैं  हालचाल जो ,
उनको मेरा जवाब कि , भारत बड़ा खुश है !

ऐ दुश्मनों ! गंर तुम भी , हिमाकत  नहीं करो ,
तो तुमको भी आदाब कि ,भारत बड़ा खुश है !

सोमवार, 27 अक्तूबर 2014

tanu thadani तनु थदानी नेता हैं हम

हमने अपनी बुद्धि , कमल या ,हाथ बना कर रक्खी है !
तभी तो हिस्से अपने केवल ,  मात बना कर रक्खी है !

नहीं कोई इंसान यहाँ है , हिन्दू - मुस्लिम- सिख यहाँ ,
राजनीति  के  आड़े  ऐसी , घात  बना  कर  रक्खी  है !

तुम जनता हो कमियाँ मेरी,गिन-गिन अपनी उमर भरो ,
नेता हैं  हम, हर कमियों  पे , बात  बना कर रक्खी है !

कोई  जर्मन  शेफर्ड   है  तो , कोई  पामोलिन  यहाँ ,
हमने तो भई, कुत्तों  में  भी , जात बना कर रक्खी है !

घोड़े अब गदहों से मिल कर,आलस का व्यापार करें ,
उल्लु से मिल चमगादड़ ने , रात  बना कर रक्खी है !


रविवार, 26 अक्तूबर 2014

tanu thadani तनु थदानी यहाँ पे सब ही ज्ञानी हैं

किसी को राम के अवगुण कहो तो ,चिढ़ वो जाता है !
किसी को ये कहो अल्लाह नहीं है , भिड़ वो जाता है !

कहीं  वो  भूल  न  जाये , वो  हिन्दू है , इस भारत में ,
तभी  तो  श्राद्ध  में  वो  डाक्टर , पंडे   खिलाता  है !

कभी  जकात  के  खर्चे  का  ब्योरा , माँग कर देखो ,
सुनोगे , दोस्त हो काफिर के जो ,ये सब सिखाता है !

कोई भगवा पहन खुश है , तो कोई टोपी जालीदार,
हमें  इक  वेष  में  वो  टांक  कर , उल्लु  बनाता है !

सबों  के  पास अपने मतलब वाले , ज्ञान सी शै है ,
यहाँ पे सब ही ज्ञानी हैं ,क्यूँ 'तनु ' सिर खपाता है ?

शनिवार, 25 अक्तूबर 2014

tanu thadani तनु थदानी किसी को दुःख न बाँटो

न पूछो क्या बताऊंगा , क्या डरते देखा मैंने !
बदन में आत्मा थी ,जिसको, मरते देखा मैंने !

यहाँ धोखे भी इक आदत की तरह, हो गयें जी ,
किसी को शर्म न आती , यूँ  करते  देखा मैंने !

वफा  के  जिक्र  पे , पूरा  शहर  ही रो रहा  है ,
वफा सीलन तरह,घर घर ही , झड़ते देखा मैंने !

नदी मिलती है समुन्दर में , कोई श्राप होगा ,
वो मेरे दिल की नदी को , यूँ करते देखा मैंने !

आँख  भर आई मेरे धैर्य की , था दर्द इतना ,
अपने घर में जब, खुद को,बिखरते देखा मैंने !

मुझे मासूमियत मुस्कान से भी , डर है लगता ,
वो मीठे पेड़ पे विष को , निखरते देखा  मैंने !

किसी को दुःख न बांटो ,है सभी के पास दुःख ही ,
सुखों की चाह में , सबको ही , लड़ते देखा मैंने !

गुरुवार, 16 अक्तूबर 2014

tanu thadani तनु थदानी. इक उम्र गुजरती है

जो वक्त ने पढ़ाया , मास्टर जी क्या पढ़ाते !
जीवन  गुजारा  हमने , धोते- नहाते- खाते !

धरती पे सबका जीवन, शायद हसीन होता ,
तमीज से ही हम जो , पहचाने अगर जाते !

गंर आईने  में अपना, जो चित्र नहीं  दिखता ,
केवल चरित्र दिखता , तो हम भी सुधर जाते !

हम  जानवर  हैं  कैसे , कि  पेट के लिये ही ,
रब  का दिया  वो  तोहफा , ईमान बेच आते !

हम सभ्यता के आशिक, मंगल व चाँद छाने ,
जो  दिल  हमारे  पास , उसे भूल भूल जाते !

माँ सच है, पिता सच है , भाई बहन भी सच है ,
वो मौत भी तो सच है , हम क्यूँ हैं भूल जाते ?

पत्थर जमा किये क्यूँ ? कंकर जमा किये क्यूँ ??
इक  उम्र  है  गुजरती , ये  अक्ल  आते  आते !

बुधवार, 15 अक्तूबर 2014

tanu thadani तनु थदानी.थोड़ी तो शर्म दो ना

जन्नत को घर में टांका ,रब तू बना जो धागा !
तू माँ  में  मेरी  दिखता , ये  सोने  पे  सुहागा !

ये  नाम  के  मसले  पे , क्यूँ  लोग हैं झगड़तें ,
मैंने  तो  जो  भी मांगा , बस हाथ जोड़ माँगा !

चालाकियों  में  अपनी , हम  दर्ज  तुझे करते ,
हमसे कहीं है बेहतर,  वो काला काला कागा !

भजनों की लय न जानु, नमाज  वजू क्या है ?
वो पल दीवाली ईद है , जब नींद से मैं जागा !

न  बैट्री  न  बिजली , फिर भी है हम में ऊर्जा ,
तेरा  ही  करिश्मा  ये , जो  बूझा न, अभागा !

हर  साँस से तू आता , हर साँस से तू जाता ,
फिर भी युगों -युगों से तुझे खोजते हैं गा गा !

मंदिर हो या हो मस्जिद, या चर्च, सब हैं मंडी ,
तू रोज वहाँ बिकता , सालों  से  बिना नागा !

हमें शर्म क्यूँ न आती ? थोड़ी तो  शर्म दो ना ,
तुझको  ही  बेच  खाते , ये कैसा रोग लागा ??  

सोमवार, 22 सितंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी तुम्हारी है नहीं गल्ती

कभी  जब  देखना  वो  ट्रेन  में , झाड़ू  लगायेगा !
लगा  झाड़ू  को  वो चुपचाप, हाथों को फैलायेगा !

फिसल के शक्ल उसकी ,कद, तुम्हारी आँख नापेगी ,
तेरा बच्चा नहीं तब भी तुम्हें , क्या याद आयेगा ?

किसी के पास उसके दर्द  का , मरहम  नहीं  होता ,
निगल के बालपन खुद का ,भला वो क्या बतायेगा ?

तुम्हारी  है  नहीं  गल्ती , तुम्हें  भी  है  पता ये  ही ,
कि  तेरी  आँख  लगते  ही  तेरा , जूता  चुरायेगा !

कभी  मासूमियत उसकी तुम्हें, मिल जाये ,रो लेना,
कि इससे ज्यादा तुमसे और कुछ भी, हो न पायेगा !

मंगलवार, 16 सितंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी हमारी भूख से है दोस्ती

जहाँ  एकांत  की  वारिस, कई  मज़बूरियां  होंगी !
वहाँ  मुस्कान  से खुशियों की भी , कुछ दूरियां होंगी !

यहाँ  जीवन  निपटता  है , महज़ इक घर बनाने में ,
ईमानदार    घर मालिक की शक्लें , झुर्रियाँ होंगी !

हमारे  देश के  नेताओं को , हल्के में ही  लेना  ,
उनकी बातें बड़ी , हाथों में मगर,  चूड़ियां  होंगी !

हमारी भूख से है दोस्ती , तुम   मानो न मानो ,
यहाँ बच्चों से सपने पूछो तो , बस पूरियां होगी !

सोमवार, 15 सितंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी मुझे फिर से दुलारो माँ

ये  दुनियां  ठग  का है मेला ,ये  ठग तो,जुल्म ढ़ा  गयें !
हमारी  आत्मा  से  , आत्मीयता   , को   सुखा   गयें  !

किसी  जल्लाद  के  आगे ,मैं  इक  गर्दन  हूँ  दुनियां  में ,
कभी  जो  दोस्त  थें , जल्लाद  के , माने  सिखा  गयें !

तेरे  घर  आने  से  पहले , वो  बक्से  छोड़  आया  माँ ,
कि जिसमें दुनियां भर  के ,दर्द  ओं  दुःख,थें समा गयें !

मैं  रोऊं  क्यूँ  भला माँ , जो तुम्हें , देखा है अरसे बाद,
मेरी  आँखों  में  ये आँसू  तो , शगुन, बन  के  आ  गये !

मुझे  फिर  से  दुलारो  माँ , मुझे  फिर  से  संवारो  ना ,
ये  दुनियांदारी  वाले  कहकहे , दिल  को  दुखा  गयें !




गुरुवार, 21 अगस्त 2014

tanu thadani तनु थदानी हम ढ़ूंढ़ते हैं क्यूँ भला

ना लोरियां , बाँहों का झूला , सो रहा बचपन !
न  गोद  है  सिरहाने , न  ही प्यार का आँगन  !

ईटों  पे सर रख  , भूख ओढ़ , सो रहा बच्चा ,
ये  है  नहीं  कोई  कथा  , ये  देश  का  दर्पण  !

सपनों  में  भी  मासूम, माँ  को खोजता होगा ,
हम क्यों न हों विचलित,गिरे क्यूँ न अश्रु कण!

धरती  पे  ही  जब  है  नहीं ,सुकून ओं  मंगल  ,
हम ढ़ूंढ़ते हैं  क्यूँ  भला  , मंगल में जा जीवन  ?

शनिवार, 16 अगस्त 2014

tanu thadani तनु थदानी तेरे ही हक़ में कहता हूँ

तू कर मेहनत चुपचाप, सफलता , इक दिन शोर मचायेगी !
तू बाँट खुशी जग में , खुशियाँ , चल कर तेरे घर आयेंगी !

जिसने भी दिल में बैर रखा , दिल  बना दिया कचरा - डिब्बा ,
जब  दिल  में रखी गंदगी तो , फिर मख्खी  ही मंडरायेंगी !

हिन्दू - मुस्लिम - मंदिर - मस्जिद, रैली-रैला -दंगे- कर्फ्यू ,
सोचो  ये  बातें  भारत  की , कैसी  तस्वीर  बनायेंगी ?

जब  बात  मान कर माँ  की  हम  , अच्छे बच्चे बन जायेंगे ,
नेताओं  की  पूरी  जाति , फिर  भूखी  ही  मर  जायेंगी  !

कभी  सीधे  से , कभी  बिंब  बदल, मैं बात  पुरानी  कहता हूँ ,
तेरे  ही  हक़  में  कहता  हूँ , इक  रोज समझ तो आयेंगी !

जिसका जो काम वो ठीक- ठाक, बस काम वो अपना कर जाये ,
सचमुच  में  भारत  की  सड़कें , तब  सोने  की  बन जायेंगी !

मंगलवार, 5 अगस्त 2014

tanu thadani तनु थदानी माँ मुझे दो नींद के , कतरे कहीं से भेज दो ना

एक बचपन था सुहाना ,बस उसी बचपन को ला दो !
माँ दो ,घर दो,फिर चमकता,सा शहर ये दो या ना दो !

मैं  तरसता  हिचकियों  को , और  तेरी  रोटियों को ,
माँ  मुझे  या  हिचकियां  दे , या  मुझे  दे रोटियां दो !

माँ  मुझे  दो  नींद  के , कतरे  कहीं  से  भेज  दो ना ,
या  तू  मेरे संग  हो  ये ,मुठ्ठी भर अहसास ला दो !

एक  अंधा  सा  कुआं  है , ये  मुआ  परदेस  सारा ,
गिर  रहा  मैं ,माँ  मुझे बस, रौशनी की रस्सीयां दो !

एक खबरी ने बताया , छत  टपकती  है अभी तक,
माँ ओं मैं लाचार  दोनों , ऐ खुदा! बारिश तो ना दो !

रविवार, 3 अगस्त 2014

tanu thadani तनु थदानी हम नासमझ थे.

हम नासमझ थे धर्म की , बातों पे अड़ गये !
कंगले रहें हम, नेता जी के , घर ही भर गये !

बच्चे  को  ना  पढ़ा सके , न घर ही बनाया ,
टोपी तिलक के नाम ही , जीवन ये कर गये !

 हमारी  गरीबी  का  यही ,  अर्थशास्त्र   है ,
लड़े  बन  के  पशु  हम, पशु  खेत  चर गये !

गाजा में मरने वाले  या , कश्मीर  में पंडित,
दोनों  जगह  इंसान  थे , इंसान  मर  गये !

ईश्वर  हमारा  है   ,और  अल्लाह  तुम्हारा ?
कैसे  हमारी  अक्ल  पे ,पत्थर ये पड़ गये ??
----------------------    तनु थदानी


शनिवार, 2 अगस्त 2014

tanu thadani तनु थदानी काफिर ही मैं अच्छा

अल्लाह की ही सांसे हैं, मैं अल्लाह का बच्चा !
अल्लाह का सब  खेल  है , क्यूँ  खा रहे गच्चा ?

पैदल क्यूँ अकल से फिरे , धर्मों की सड़क पर,
लिख पढ़ के भी तू क्यूँ रहा ,है अक्ल से कच्चा ?

जो माँ की पूजा  करते  ही , काफिर मुझे  कहा ,
मुसलमान तुम अच्छे रहो ,काफिर ही मैं अच्छा !

ये सर- बदन- दिमाग-जात,  सब वतन की  है ,
जीया  जो वतन  के  लिये , इंसान वो  सच्चा !

सोमवार, 28 जुलाई 2014

tanu thadani तनु थदानी दही जमाई है

न पूछो हिन्दू हूँ , फिर क्यों कर मैंने, ईद मनाई है ?
वो मेरा दोस्त बड़ा खुश है , तभी तो, ईद मनाई है !

मैं उसकी अम्मी को अक्सर, अम्मी ही कह जो देता था ,
उसी ने हँस के मुझको , आज वो बातें ,याद दिलाई है !

कभी बचपन में उसको रंग के ,संग खिचवाई इक फोटो,
सभी ही पूछा करते देख वो फोटो , 'छोटा भाई  है '?

किसी का काम ही हो जो दूध फाड़ना , नींबू वो खोजे ,
वो मैंने दूध में थोड़ी दही मिला के , दही जमाई है !

सोमवार, 21 जुलाई 2014

tanu thadani तनु थदानी ये खबरें आजकल की




ये सांसे व्यस्त हैं इक ढ़ोग में , कुछ ना बतायेंगी !
क्यूँ इनसे प्यार हैं करते , ये हमको मार जायेंगी !

दिमागी गंदगी को पूर्णतः बाहर निकालो फिर,
कड़कती धूप सोखेगी , या बारिश लील जायेगी !

बदन के मैल को चाहे छिपाओ, साफ कपड़ों में ,
मगर ये गंध तो है बेवफा , सबको बतायेगी !

हमारी भूख में शामिल है जो,जिस्मों की भूख भी ,
अगर हम बच न पायें ,हम सबों को ,खा ये जायेगी !

 नहीं पूरी तरह अखबार को तुम, पढ़ न पाओगे ,
ये खबरें आजकल की देखना , इतना रुलायेंगी !

तुम्हें मरहम लगाता हूँ ,हमारे हाथ जलते हैं !
तुम्हें तो प्यार हो न हो , मगर हम प्यार करते हैं!

तुझे हम प्यार करते हैं प्रिय , इसलिए तुझको
तुझे कमियों के संग संग ही,स्वीकार करते हैं !

कोई जो संग शर्तों के , करे है प्यार की बातें ,
मेरी मानो वो प्रेमी  , प्रेम संग व्यापार करते हैं !



रविवार, 22 जून 2014

tanu thadani तनु थदानी लखनऊ चमकता रहे सदा


जब जब सड़कें उग आतीं हैं वो मेरे गाँव को खाती हैं !
बापू  पापा  बन जाते  हैं  ,अम्मा  मम्मी  बन जाती है !

पसरा पसरा इक इंतजार सा, जीवन हर घर मिलता है ,
घर की रौनक घर भरने को , जब दूर शहर को जाती है !

किस शहर ने दस्तक गाँव को दी,इसकी चर्चा बेमानी है
सब लूट के जाते जाते वो , कह गया कि हम देहाती हैं !

तुम खाक मनाते हो खुशियाँ,हम रोज यूं खुशी मनाते हैं ,
जब गाँव में मेरे दिन भर में,दो पल को बिजली आती है!

लखनऊ चमकता रहे सदा ,हर गाँव ने यही दुआ की है ,
पर समझ न आता नेताओं को,गाँव से घिन क्यूँ आती है ??

शनिवार, 31 मई 2014

tanu thadani तनु थदानी क्या होता है प्यार में ऐसा


सूख के पपड़ी, बने होंठ को , आँखों  से  ही  धोया है !
जेहन में मेरे एक शहर था ,खुशी का अब वो खोया है !

कई  नुकीलीं   यादें   मेरे , सीने  से  लग  सोती   हैं ,
पत्थर सा दिन पूरे दिन भर, दिल ने अक्सर ढ़ोया है !

दिल जो खुश होता मेरा तो , शब्द  नाचते  फिरते भी ,
शब्दों  ने अक्षर अक्षर में , लेकिन  जख्म  पिरोया है !

एक  अकेलेपन  का  जंगल ,  उस  पे  तेरी  खामोशी ,
मेरे  दिल  से  पूछो जो कि , पूरी  रात  न  सोया  है !

क्या  होता  है प्यार में ऐसा , कोई  मुझे  बताये  तो ,
दुःख दूजे का मिला के खुद में ,दिल क्यूँ मेरा रोया है ?

मंगलवार, 27 मई 2014

tanu thadani तनु थदानी वरना हम सब अपराधी हैं

जब नयी सदी की नयी कथा , कहता हूँ आँखें रोती हैं !
विश्वास  नहीं  होता  है  कि , ऐसी  भी  नारी  होती है !

परदे ही  साक्षी  होते हैं , हर एक  गुनाहों के अक्सर,
घर की लक्ष्मी ,घर के भीतर,जब गैरों के संग सोती है!

इक  दर्द  गुजरता  रहता है , चुपके से  जब पूरे घर में ,
गमले- टेबल- बिस्तर तक में , खामोशी जिन्दा होती है !

हम अभिव्यक्ति में बिम्ब टांक, बातें करते हैं घुमा-फिरा,
बातों में वज़न तो आता है , पर बात बिम्ब में खोती है !

क्यूँ नहीं मानते सीधे से , हम फंसे पतन के भंवर में हैं ,
सब चमक रहें, पर नकली हैं , ये जितने हीरे -मोती हैं !

अपराधी वो जो पकड़ गया ,वरना हम सब अपराधी हैं,
हर  एक  रुह, जो  ईश्वर  है , मैली  काया को ढ़ोती है !

गुरुवार, 15 मई 2014

tanu thadani तनु थदानी . बस भारतीय ही कहना

रब चाहिये तो कहना , सब चाहिये तो कहना !
बस  एक  मुस्कुराहट का , लाईये  तो  गहना !

देना  अगर  जनम  हो , इक  सोच नयी को तो ,
पीड़ा वो प्रसव सी भी ,तुम्हें चाहिये तो सहना !

गाँधी  भी  सही  होंगे , पर  मेरी  भी  सुनो तो ,
कोई  करे  जुलुम  तो ,  चुपचाप  नहीं  रहना !

जिस काम को करो तुम  , डूबो पूरी लगन से ,
लाशों  सा  व्यर्थ  ऊपर, लहरों  पे न तू बहना !

ओशो या बुद्ध में डूबो , टोपी  लगा  या टीका ,
कोई जो पूछे तुमको , बस भारतीय ही कहना !
--------------------------  तनु थदानी

सोमवार, 5 मई 2014

tanu thadani तनु थदानी खुदा है बाप हम सबका

कोई तुमको,कोई मुझको ,इक दूजे से डराता है !
कहीं हम एक ना हो जायें , वो इससे खौफ़ खाता है !

कोई बोले जो वंदे मातरम,न बोलना, समझो ,
तुम्हारी माँ की वो इज्जत न करता , ये बताता है !

मुसलमां क्या,वो इंसा तक, भी होने के नहीं काबिल,
बता के अल्लाह की मर्जी,जो गोली को  चलाता है !

खुदा है बाप हम सबका , उसे रिश्वत न लागे है ,
मगर इंसान लड्डू चादर का  ,मस्का लगाता है !

हमारे देश के आंसू , अजायबघर में रक्खे हैं ,
मेरी आंखों में सुख का ऐसा सपना , झिलमिलाता है !

रविवार, 20 अप्रैल 2014

tanu thadani तनु थदानी हमारे धर्म गुरुओं ने सियासत सीख ली आखिर

थोड़ी शोहरत के लिये , शख्स जो , चेहरा बदलता है !
उमर भर उसका ही साया , अजनबी बन के चलता है !

जो हमने हाशिए रच कर , जगह दी प्यार को उसमें ,
सभी  मज़नून  में  हो  कर भी , न होने सा खलता  है !

यहाँ इज्जत की  हैं  कब्रें , हवस  की  लूट  है  होती ,
शहर मेरा सुबह  से  शाम  तक ,यूं  ही सुलगता  है !

तुम्हारे लफ्जों  में  अक्सर  सुना , सत्ता ज़हर होती ,
बताओ फिर तुम्हारा दिल क्यूँ,सत्ता को मचलता है ?

शहीदों  में  भी  हिंदू  ओं मुसलमां , गिन  रहें  नेता ,
धरम   की  आग  पर बे शर्म नेता , देश  तलता   है !

हमारे  धर्म गुरुओं ने , सियासत, सीख ली आखिर,
तभी आव्हान ओं फतवे से मेरा , दिल दहलता  है !

मंगलवार, 8 अप्रैल 2014

tanu thadani अगर तुम प्रेम में डूबे तनु थदानी


कोई  अल्लाह  है कहता , कोई  भगवान  कहता है !
अरे ! मिलता ये आखिर क्यूँ नहीं , कहाँ ये रहता है ?

कोई  घंटा  बजाता   है , कोई   अज़ान   है   देता ,
कबीरा उस सदी से इस सदी तक, क्यूँ ये सहता है ?

तुम  रोये  मंदिरों औं मस्जिदों  के , टूटने पे  क्यूँ ?
तुम रोते क्यूँ नहीं तब, घर, गरीबों का जो ढ़हता है !

हमें  तो  शर्म  है  आती , हमारे  आचरण  पे अब,
वफादारी में कुत्ता तक भी , हमसे आगे रहता है !

चलो  इक  घर बनाते हैं , वहाँ बचपन बनाते हैं ,
चलो फिर डूब के देखें , जहाँ बस प्रेम बहता है !

अगर तुम प्रेम में डूबे , तो मानव बन के निखरोगे ,
यही मस्जिद भी कहती है ,यही मंदिर भी कहता है !

शनिवार, 29 मार्च 2014

tanu thadani मैं अपने दुश्मनो को यूं भी सज़ा देता हूं तनु थदानी


मैं अपने दुश्मनो को, यूं भी सज़ा देता हूं !
हमेशा खुश लगा रहता हूं,मुस्का लेता हूं !

तू मुझ पे आंख मूंद, कर लो भरोसा बंधु,
न  कोई  मंत्री हूं , ना   मैं  कोई  नेता  हूं !

मुझे उस रब ने बनाया है,संभालेगा वही ,
बड़े आराम से , कागज की नाव खेता हूं !

किरायेदार मेरे , मुझसे ही मांगे  किराया,
अजीब शख्स हूं,अब तक भी नहीं चेता हूं !

मेरी खुशियों के ख़जाने का पता ,जो पूछे,
उसे मैं घर में अपनी , माँ से मिला देता हूँ !




शुक्रवार, 28 मार्च 2014

tanu tjadani याद तू आयी तनु थदानी

माँ  को  देखा  कपड़े  धोते !
भूल के ऐनक पहन के सोते !

प्यार लफ्ज़  के प्यारे  माने ,
माँ  न  होती , कभी न होते !

हमें  सुकूं  के  मोती  मिलते ,
माँ की याद में लगा के गोते !

 माँ से  ही  तो घर  है बनता ,
हर  इक  रिश्ते  माँ से होते !

मेरा  बचपन  बचा  रखा  है ,
माँ  ने  उम्र  को  खोते खोते !

जिक्र तेरा  माँ प्यारा गमला ,
बड़े   हुये  हम  यादे  बोते !

देख के खाली  हाथों  को माँ ,
याद  तू  आयी  रोते - रोते !

सोमवार, 24 मार्च 2014

tanu thadani किसी से प्यार मत करना तनु थदानी

मैं खाली हूँ नहीं , मुझमें दुःखों का ,इक खजाना है !
मगर ये ज़िद है मेरी ,मुझको केवल हँसते जाना है !

तुम जिसको प्यार हो कहते, वो केवल ढ़ोंग है होता,
यहाँ दिल छूट जाते हैं , महज़ जिस्मों को पाना है !

मुझे  तोहफे  में धोखे  दे के , मेरे  साथ वो हो  ली ,
उसी के साथ अब मुझको , यहाँ जीवन बिताना है !

मेरे घर माँ मेरी खुश है बहुत, बस इसलिए मुझको,
मेरी खुशियों की कीमत में भी , मेरा घर बचाना है !

मेरी नज़रों के आगे रहता है , विश्वास का कातिल,
मेरी मजबूरियाँ देखो , उसी से दिल लगाना है !

किसी से प्यार मत करना ,कभी विश्वास न करना ,
महज़ अल्लाह अपना है, यहाँ सब कुछ बेगाना है  !



रविवार, 23 मार्च 2014

tanu thadani हम खुद से ही शुरुआत आखिर क्यूँ नहीं करते तनु थदानी


क्या  कहूँ  कि  कैसा  मैंने , ऐब  पाला है !
 हर ग़ज़ल में मैंने अपना ,दिल निकाला है !

मैं  परेशां  था कि मुझको , दिख नहीं रहा ,
क्यूँ समझ आया नहीं , चश्मा ही काला है !

कुछ  नहीं  अब  स्वाद, जिंदगी में आ रहा ,
मुँहलगा  सा  मुँह  में मेरे , एक  छाला  है !

घर  समाजवादियों  का ,  देख  मैं  हैरान,
समाजवाद ए टी एम सा , कर जो डाला है !

गिध्द ने रो कर कहा ,संसद में ,कि उसका,
देश  के  नेताओं  ने  ,  छीना  निवाला  है !

हो रही जो कम गरीबी , क्यूँ नहीं दिखती ?
सरकार के रिकार्ड में कुछ, गड़बड़झाला है !

रुपये कमाये तीस तो , सरकार चिल्लाई,
वो  कहाँ  गरीब , वो  तो , भेष  वाला  है !

सरकार बदलने से होगा , कुछ नहीं यहाँ ,
हम  दिलों  से सड़  चुके , ज़ुबां पे ताला है !

हम खुद ही से शुरुआत,आखिर क्यूँ नहीं करते ?
क्या  कोसने  से  दूसरा ,  सुधरने  वाला है ??.

शुक्रवार, 14 मार्च 2014

tanu thadani तू मेरी नींद में आना तनु थदानी


तू मेरी नींद में आना
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मेरे घर में नहीं बिटिया , मेरा घर खो गया है !
बहुत लाचार हूँ , मिलता नहीं , जो जो गया है !

अरे ! सीने पे पत्थर रख , मैं दुःख पी भी लेता ,
करूँ मैं क्या ,जो सीना मेरा ,पत्थर हो गया है !

बहुत चालाक था कि , सारी दुनियां  लूट  लूंगा ,
बिना बिटिया ये जीवन लुट गया,दिल रो गया है !

मेरी बिटिया  तेरी छम छम, मेरे अंतस में गूंजे ,
मेरा  भगवान  मेरे  अंदर , तुझको  बो गया  है !

तेरे बचपन, तेरी किलकारियों में , बंध गया मैं ,
तू  मेरी  नींद  में आना , ये  पापा  सो गया  है !

शनिवार, 8 मार्च 2014

tanu thadani chalo khatey kasm hain ab. चलो खाते कसम हैं अब तनु थदानी


क्या हम इंसान थें , या हिन्दू मुस्लिम, क्या बतायेंगे ?
हम अपने बच्चों को , जाने से पहले क्या बतायेंगे ?

हमारे  देश  को  फाड़ा गया , अखबार की मानिंद  ,
कि हम सब एक थें , सदियों से , कैसे भूल  पायेंगे !

हम  ही  बस श्रेष्ठ  हैं , बस इसलिए हम लड़ते रहते हैं  ,
वहाँ  अल्लाह -प्रभु  है एक, जहाँ हम मर के जायेंगे !

हमारे  पास  इक  सी  माँ  है , घर  है , बच्चे  इक  से है  !
हमारी  इक  सी  कोशिश  है , कि   कैसे  मुस्कुरायेंगे  !

कि जिस दिन ठान लेंगे हम,  की मोहरें  हम नहीं  इनके  ,
हमारे   मौलवी   पंडित  व नेता  , कर   क्या  पायेंगे  ?

महज   भाषा  से  हमको  जोड़  कर  ,  लड़वा  ये देते  हैं  !
तो  आखिर अक्ल को अपनी , बता हम कब जगायेंगे  ?

हमें  महफूज  रखनी है ये दुनिया ,  बच्चों की खातिर,
चलो  खाते  कसम हैं अब, कि   इंसा  बन  दिखायेंगे  !

शनिवार, 1 मार्च 2014

tanu thadani मौसम वोट का क्यूँ आया तनु थदानी

आँखें सपने भर लायी !
नेताओं ने लोरी गायी !

देश लुटा चप्पे - चप्पे ,
कौन  करेगा  भरपाई  ?

लाभ हानि ही पढ़ा लिखा,
फिर अपनी आयु खायी !

इज्जत केवल रस्म बनी ,
ये कैसी कालिख छायी ?

बोयी थी खामोशी फिर,
चींखे कैसे उग आयी ?

मौसम वोट का क्यूँ आया ?
गली गली है घबरायी !!

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

tanu thadani. तनु थदानी चाहे मैं हिन्दू मुस्लिम तुम

तुम इत्र लगाओ हम कुमकुम  !
इक  जैसे ही तो हैं हम - तुम  !

हम  रोते  भी  तो इक  सा हैं ,
चाहे  मैं  हिन्दू  मुस्लिम  तुम  !

हंसते  हैं  हंसी भी इक जैसी ,
मरते   हैं  तो  हो  जाते  गुम  !

बुद्धु  हैं  तभी   तो शासक  ने,
माना  हमको बस एक हुजुम !

जब शक्ल  हमारी  इंसा  सी ,
आदत से क्यूँ  कुत्ते की दुम  !





मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

tanu thadani हम इतने तन्हा बैठे हैं तनु थदानी


मत पूछ क्यूँ उकड़ू लेटे हैं !
दीवाल ने  कमरे  फेंटे  हैं !

ग़ज़लें मेरी मेरे दुःख का ,
पूरा  संसार  समेटे  है !

उकताई  यूं  अब  तन्हाई,
खामोशी  लिये  लपेटे  है !

हर मिनट की साँसे गिनते हैं ,
हम  इतने  तन्हा  बैठे  हैं  !

मेरे घर बीच दीवाल  उठी ,
क्यूँ  कि  मेरे  दो  बेटे  हैं !

शनिवार, 22 फ़रवरी 2014

tanu thadani माँ ने अब तक पूछा ही नहीं तनु थदानी


माँ ने अब तक पूछा ही नहीं
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दुःख से जब मैं घिर जाता हूँ , ना रोता ना चिल्लाता हूँ !
चुपचाप  मैं  माँ के  कमरे में , जा माँ को खूब हँसाता हूँ !

माँ हँसती भी  है , कहती भी है , साथ वो हर पल है मेरे,
सब जान  ये माँ  कैसे लेती , मै कभी समझ न पाता हूँ !

इक जादू ही तो है , सर पे , जब हाथ मेरी माँ रखती है ,
दुःख  छू मंतर हो जाते  हैं , इक  बच्चे सा बन जाता हूँ !

मेरी खुशियों को ,सपनों को ,वो अपना लक्ष्य बना लेती,
माँ  मेरी  मुझे  बताती  है , मैं खुद का भाग्य विधाता हूँ !

बीबी - बच्चे सब यार -दोस्त, पूछा करतें हैं घुमा-फिरा,
माँ ने अब तक पूछा ही नहीं ,मैं कितना रोज कमाता हूँ !

सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

tanu thadani ये ही जीवन है तनु थदानी


किसी जलसे में मिलना फिर बिछड़ना , ये ही जीवन है !
किसी  के  दिल  के  कोने  में  ठहरना , ये ही जीवन है !

मुझे  मालूम  है  गढ्ढे   मिलेंगे  ,  राह   में   अक्सर  ,
मुझे  है  प्यार  से  गढ्ढों को  भरना , ये ही जीवन  है  !

बने  तो  वृक्ष  फूलों  का , सभी  को  छाँव  भी  तो दें  ,
महकना  अंततः  फूलों  सा  झड़ना , ये  ही  जीवन है !

हाँ ! मेरी  माँ  ने  मेरे  नाम  की , तस्वीर   रच  डाली ,
अब  मेरा  काम  उनमें  रंग  भरना , ये  ही  जीवन  है !

जिन्होंने  गोद  में हमको  खिलाया , वो हैं अब  बेबस,
उन्हें  बच्चों  के  भाँति  प्यार  करना , ये ही  जीवन है !

बुधवार, 22 जनवरी 2014

tanu thadani ये गजब हुआ तनु थदानी

वो घर था जिसमें मेरा , वो मकान पी गई! 
इज्जत भरे बाजार,  छान - छान पी गई! 
   

पीते पिलाते थे जिसे, सम्मान समझ कर,
बोतल वो मेरी मेरा ही, सम्मान पी गई! 


छोटी खुशी समझ के जिसे, घर में लाया था ,
बेटी की खुशी बीबी की वो , जान पी गई! 

टोपी बड़ी थी सर पे मगर, ये गजब हुआ, 
छोटी सी बोतल पूरी , आन -बान पी गई! 

ठेका था लोग  पीते थे, इक दिन पता चला ,
पूरा मुहल्ला मुई  वो, दुकान पी गई  !

शुक्रवार, 10 जनवरी 2014

tanu thadani मेरी मां खुश हो जाती है तनु थदानी



जी हां ! मैं दोस्त बनाता हूं , तभी तो धोखे खाता हूं !
मैं  बुद्धु  बन  के हूं रहता , तभी तो सबको भाता  हूं !

किसी ने अपनापन लूटा , किसी ने अंतस को  लूटा ,
नहीं कुछ घटता रत्ती भर, मैं चाहे  लुट लुट जाता हूं !

किसी के अपने ही बच्चे,छिटक के बिदक के हैं रहते,
वो बच्चे साथ थे मेरे ,क्यूँ कि मैं ,बच्चा बन पाता हूं !

किसी का हाथ मिलाना,गले लगाना,झेल चुका हूं सब,
कभी हमदर्दी मत रखना,समझ मैं सब कुछ जाता हूं !

यहाँ सब खोद के खाई, खुद ही गिरते , रोते हैं रहते,
गिरे गढ्ढे में इक इक कर,  मैं चाहे लाख बताता हूं !

यहाँ पे प्रेम का मतलब,आलिंगन व चुंबन बिस्तर है ,
तभी तो लोग हैं हँसते मुझ पे,मैं तो कृष्ण पढ़ाता हूं !

अरे ईश्वर  ! न  तू इतरा , मैं  तेरे खातिर ना आता ,
मेरी मां खुश  हो जाती है , तभी तो मन्दिर आता हूं !

सोमवार, 6 जनवरी 2014

tanu thadani करुं मैं क्या तनु थदानी


मचलता मन भी जब जब, पत्थरों सा जड़ है लगता !
तभी गजलों  के घर में ,आंसुओ का  दर  है  लगता !

करे  बातें   तमाम ,   मुझसे   मेरी   तन्हाई,
बताती है कि मेरा दिल ही ,उसको घर है लगता !

क्यूँ मेरी आंखे न गीली हुईं , खुद से बिछड़ के ,
क्यूँ मेरा जिस्म सन्नाटे से,मुझको तर है लगता !

मेरी  तन्हाई फिर मुझसे ,लिपट के थरथराई  ,
बोली रो के  ,सन्नाटे से उसको डर है लगता !

हकीकत ये है कि मैं , तप रहा हूँ , जल रहा हूँ ,
करुं मैं क्या जो मेरा जिस्म, ठंडा गंर है लगता !

रविवार, 5 जनवरी 2014

tanu thadani बच्चे कमाते हैं तनु थदानी



जड़ हो गये हम क्यूँ भला ,ऐसा क्या खाते हैं ?
बाबा  को  नौकर, रुपये को , बाबा  बताते हैं !

बाबा की सेवा, यूं  ही ना , मन  मार हैं  करते ,
ये  घर  उन्हीं  के  नाम  है ,  ऐसा  बताते  हैं !

चिन्ता नहीं  बच्चे की , बाबा  घर  में  हैं रहते ,
बीबी  कहे  जानम  चलो , हम  घूम  आते  हैं !

अम्मा  करेगी  क्या  भला , साड़ी  नई  ले के ,
उफ्फ  ! क्या कहेंगे लोग,  चलो ले के आते हैं !

अब  मां  रसोई  में , ओं बाबा , बालकोनी  में ,
देखो  हम फ्लैट  वाले , कैसे  घर  सजाते  हैं !

वो शख्स घर के बाहर जो ,सोता मिला मुझको ,
पूछा  तो  बोला , अब  मेरे , बच्चे  कमाते  हैं !