सोमवार, 19 अगस्त 2013

tanu thadani हम चुप ही रहते हैं hey eshwar -3तनु थदानी ham chup hi rahte hain हे ईश्वर-3

भली  आदत  थी  वो  मेरी , वो  आँखे  बंद  रखने  की !
सबों से  कट  गया  मैं जब  लगी , आदत  परखने  की !

खफ़ा थे लोग उनकी  शक्ल  जो ,उनको  ही दिखलायी ,
गलत  आदत  थी  वो  मेरी , आईना  साथ  रखने  की !

सदा   सच  बोलना  बेटा , मगर   बेटे  ने   समझाया ,
बुरी  आदत  है  ये  मेरी , यही   इक  बात  बकने  की !

अब  रोयें  या  कहो  हँस दे ,हमें  भत्ता  तो मिलता है ,
हमें   सरकार  ने   दी   नौकरी , है   धूल  फँकने  की !

या  कोई  मार  दे  या  गाली  दे , हम चुप  ही रहते  हैं ,
कहानी   है  पुरानी   जोश  औं , जज्बे   फड़कने  की !

हमारा  दोष  ही  कह  लो ,कि  हम  विश्वास  हैं करते ,
छकाते  सुख  हमें  क्यूँ  कि,हमें आदत  है छकने की !

रविवार, 18 अगस्त 2013

tanu thadani यही सच है hey eshwar -3 तनु थदानी yahi sach hai हे ईश्वर -3

कहीं विश्वास है बिकता , कहीं  इज्ज़त भी बिकती  है !
हमारी  ये  सदी  तो  पूरा  , इक  बाज़ार   दिखती   है !

कहीं  जो  आग  लग  जाये , हमारे  दिल  झुलसते  हैं ,
उसी  पे   देख   मेरे  रहनुमा  की ,  रोटी   सिंकती   है !

यही  सच  है  तरलता  खो  गई , है   भावनाओं   की ,
सभी कुछ  हो गयें पत्थर ,कोई  खुशबू  न  टिकती  है !

यहाँ  सब  ठीक   है  बेटा , नहीं   चिंता  कोई   करना ,
नहीं माँ आजकल की , आजकल  चिट्ठी  में लिखती है !
------------- तनु थदानी



रविवार, 11 अगस्त 2013

तुमको नहीं पता है ,चुपचाप रोती माँ है hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

रूठे  हुए  हैं  हमसे ,खुशियों  के ताने- बाने !
परदेस  में  न  मिलते ,परिवार  के  खजाने !

जीने के लिए  तुमने,जो अपनी जमीं छोड़ी ,
ज़िंदा  नहीं तू  बिलकुल ,साँसे  तो हैं बहाने !

छाया  तो पकड़ लेगा,कोई गणित  लगा के , 
खुद  को  पकड़ने में ही,लग जायेगें ज़माने ! 

बहनों का मीठा  ताना,भाई का रूठ  जाना ,
वो  जा  रहें  हैं  देखो , यादों  में ही समाने !

कितने  भी  तर्क गढ़ ले ,निष्कर्ष तो यही है ,
घर  में  थी दाल-रोटी,बाहर भी वो ही दाने ! 


तुमको नहीं पता   है ,चुपचाप  रोती माँ  है , 
दुःख ढेर सारे होंगे ,क्या बोला कभी माँ  ने ? 

समझे थे जिसको दौलत,ढूंढा शहर-शहर में ,
क़दमों में मिले माँ के ,जीवन के पल सुहाने ! 

बिटिया का चंचल बचपन,न हाट में मिलेगा ,
लौटेगा जब  तलक तू ,वो  भूलेगी  तुतलाने !

जाना  तो कब्र  तक  है ,दौड़ो यहाँ-वहां तुम,
आएगी अकल कब तक,अब ये तो राम जाने ! 






    
    

  

शनिवार, 10 अगस्त 2013

tanu thadani ka vinmrh aagrh तनु थदानी का विनम्र आग्रह ------

तनु थदानी का विनम्र  आग्रह -----



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बुधवार, 7 अगस्त 2013

अवाक से हम रह गयें hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }awaak se ham rah gayen

हो सीमा या हो खेत  अब ,मरने का  समां हो गया  !
क्यूँ  भारतीयता  का  हमें , अवैध  गुमां  हो  गया  ?

निराश   हूँ   यूँ   कि   यहाँ  ,  इक   भारतीय  नहीं  ,
सिख - मुसलमा -हिंदू  जैसा , खूब  जमा  हो  गया  !

अब   आदमी   के  बारे   में  , बोले  तो   क्या  बोले ,
जब  राम  हिन्दू   हो  गया ,ख़ुदा  मुसलमा हो गया !

कुत्तों   से   सीखा   भौंकना  ,  सीखी   नहीं   वफ़ा  ,
वो  देश  के  हैं  नेता  जी ,सो उनको  क्षमा  हो  गया !

औकात   की   तो   बात   न  , करना   कभी  पगले ,
भारत  समूचा  आजकल ,इंडिया  में  रमा  हो  गया !

रुपया   नहीं   गिरता  कभी , गिरता   हमारा  मोल  ,
न  पूछ  यहाँ  दर्द  की  , कैंसर  को  दमा  हो  गया !

संसद   हमारी   भर  गयी  , गिरगिट   से  अचानक  ,
अवाक से  हम  रह  गयें ,सब  कुछ  यूँ  थमा हो गया !   

सोमवार, 5 अगस्त 2013

मिलो इक बार, hey eshwar-3 (tanu thadani) milo ik baar, हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

हमें  ना  पूछना  कि  हँस  नहीं , क्यूँ  पा  रहें  हैं !
हमें   गुजरे   जमाने  याद ,  बरबस   आ  रहें  हैं ! 

किसी  से  मिल के बिछड़ने  से  मिला खालीपन ,
तमाम  जश्न  उसे  क्यूँ  नहीं,  भर   पा  रहें   हैं  ?

जिन्होंने बस  किया व्यापार, हर इक  सूरते-हाल,
वो  हमको प्यार  वाला फ़लसफ़ा,  समझा रहें हैं !  

यूँ  की  तौहीन, जिस्मो  से  हमारा , इश्क तौला ,
हमारे  इश्क  पे  क्यूँ  यूँ  क़हर ,  बरपा   रहें   हैं ? 

मिलो इक बार मकसद हो भले ,बिछड़न ही सही ,  
कतल  उस ख्वाब का कर डाल ,जो  घबड़ा रहें हैं !

कभी  हिंदू  मुसलमा  बन  के , फिरे  थे  यहाँ  पे  ,
तुम्हारे  इश्क   में   इंसान   बनते   जा  रहें   हैं  !

तू  मस्जिद जा,मेरे लिये तो ख़ुदा, वो  ही है  बस ,
मेरे  महबूब  की  अच्छी  ख़बर ,जो  ला   रहें  हैं !

कभी वो दिन भी न आये , कि  हंसू  बिन  तेरे  मैं ,
जमीं  पे  मछलियों   सा  देख ,  छटपटा  रहें   हैं !