मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

tanu thadani मेरी मां तनु थदानी


कभी न मैं भी रोऊंगा , कभी तुम भी नहीं रोना !
मेरी मां लौट जल्दी आऊंगा , उदास मत होना !

मेरा तकिया भी तेरी लोरियों को, गुनगुनाता है ,
तेरे घर भी रहे आबाद, बचपन का मेरा  कोना !

सभी कुछ है मगर मन मेरा, मांगे  रोटियां तेरी ,
मेरे सपनों में आ के गोल  गोल, रोटियां दो ना !

बिना तेरे ओ मेरी मां , यहाँ तो युद्ध है जीवन,
ये दुनियां पूरी पीतल की,तेरा आंचल ही था सोना !

तुम्हें क्यूँ अब भी लगता है ,मुझे दुःख है यहाँ कोई,
बस पूरा धुल गया, न सीख पाया, कपड़े मैं धोना !

तेरे आंगन में मेरे मन को , मां मैं छोड़ आया था ,
पकड़ रखना उसे जाने न देना , अब तो खुश हो ना ?

रविवार, 29 दिसंबर 2013

tanu thadani चलो समर्पण बोतें हैं तनु थदानी


पत्थर पूजें , कृष्ण को माने , मन में मीरा भी गाये !
लेकिन शर्म जो नहीं नयन में, प्रेम जनम कैसे पाये ?

लाखों मीटर खोदा मैने, हर इक दिल को  कलयुग में ,
प्रेम मिला न रत्ती भर भी , मिलें थे पत्थर मुँह बाये !

जय माता दी अल्लाह अल्लाह,कहते कहते जब लड़ते,
प्रेम ही कटता,प्रेम ही मरता ,घर वापस बस तन आये !

जीवन  की  रफ्तार  तेज  है , रौंद  प्रेम  आगे  बढ़ते ,
जाना कहाँ है नहीं है निश्चित, कैसे कहाँ पे रुक जाये ?

सत्संग से कोठे तक वाले, शोध पत्र में खोज लिये ,
जिक्र प्रेम का अलग अलग था , परिभाषा में दर्शाये !

हमें  पढ़ाना  प्रेम है  लेकिन, शक्ल  प्रेम  की भूल गयें ,
भावी नस्ल में प्रेम को कैसे , बतलाये ओं समझाये !

प्रेम की खेती कर भी ले हम, लेकिन  बीज कहाँ बंधु,
चलो समर्पण बोतें हैं फिर, शायद प्रेम ही उग आये !

tanu thadani करो जो इश्क तनु थदानी


जो  इंसान  हैं  चाहत  कभी , मरनी  ना  चाहिये !
करो जो इश्क  तो फिर आत्मा , डरनी ना चाहिये !

कई  काबिल  निकम्मे  क्यूँ   हुये , बर्बाद क्यूँ  हुये ,
भला क्यूँ आंखें आखिर इश्क में ,पड़नी ना चाहिये !

ये  मेरी  जिंदगी अकेले  मिलती , क्यूँ नहीं मुझसे ,
बहुत  सी  बातें  सरेआम  तो , करनी ना चाहिये !

गिलों के कप में हो शिकवे , पियुंगा लाख हो कड़वे ,
गिलों के कपों में तो जिद़ कभी , भरनी ना चाहिये !

ना पूछो खेलता क्यूँ  मैं यहाँ , तुकबंदियों के संग,
कोई भी आह दिल में देर तक,  सड़नी ना चाहिये !

गुरुवार, 26 दिसंबर 2013

tanu thadani घर लौट के आना तनु थदानी

यादें  कभी  न  पोछना , घर  लौट  के  आना !
पैसों  के  लिये सोच  ना , घर लौट  के  आना !

थक  जाना  जब  पैसे कमा , परदेश  में  बंधु ,
मां  के  लिये  भी सोचना, घर  लौट  के आना !

 रंगीनीयां  दुनियां  की  तुझे  , लील  जायेंगी ,
प्रलोभनों  को  कर  मना ,घर  लौट  के  आना !

छत अपने ही घर की सदा , महफूज  है होती ,
रोने  से  भी दिल अनमना , घर लौट के आना!

तेरे  बिना बिटिया का जो ,बचपन  गुजर गया ,
आ  के  उसे  ना खोजना , घर लौट  के  आना !

 तू बन गया , घर बन गया , ब्यापार भी बना ,
परिवार  भी  तो इक बना , घर लौट के आना !

बुधवार, 25 दिसंबर 2013

tanu thadani मुझसे न प्रेम किजिये तनु थदानी

मैं  तो  बस  लिबास  हूं , मुझसे  न  प्रेम  किजिये !
किसने कहा कि खास हूं ,मुझसे  न  प्रेम  किजिये !

मन्दिर मैं जाऊँ  क्यूँ भला , जो  हूं  मैं  मां  के संग,
जाहिर  है  कि बदमाश हूं ,मुझसे न  प्रेम  किजिये !

सच  कह  रहा  हूं  जानिए  , मुरदों  के  शहर  में  ,
इक  सांस  लेती लाश हूं , मुझसे न  प्रेम  किजिये !

परिचय  के  लिये  जानिऐ  , मेरा  पता  अब  ये  ,
भूखों  के  लिये  घास हूं  ,मुझसे  न  प्रेम किजिये !

मस्जिद  में भजन गा  पिटा ,है  बात  कल  ही की ,
अब  मंदिरों  के  पास  हूं , मुझसे  न  प्रेम किजिये !

मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

tanu thadani क्या ये सियासत है तनु थदानी

खुद  ही  का  घर  है लूटता ,क्या  ये  सियासत  है ?
अपनों  का  साथ  छूटता ,  क्या  ये  सियासत  है ?

आते   चुनाव   आदमी    का  , जिस्म   ओं  ज़मीर,
इक   बुलबुले   सा  फूटता , क्या  ये  सियासत है ?

सौ   दिन   में   गरीबी   हटायेंगे   कहा   था   ये,
सचमुच ही वो सब  झूठ  था ,क्या ये सियासत है ?

हमने  जगह   दी   पलकों  पे , पर   यहाँ   उनका ,
सर  पे  हमारे   बूट था  , क्या  ये  सियासत  है ?

वोटर  फटी  कमीज  में  ,  नेता  जी   सदन   में ,
उनके  बदन  पे  सूट  था ,क्या  ये  सियासत है ?

मेहनत  की   पेट  बांध  के , रुपया  गया  गिरता ,
सब  कह रहें  थे भूत था , क्या  ये सियासत है ?

कुत्ते  ने  काटा , जब  की  मैं , बैठा  था  ऊंट   पे ,
 ये किस तरह का ऊंट था ,क्या  ये  सियासत है ?

रविवार, 22 दिसंबर 2013

Tanu Thadani बचपन मेरे तू लौट आ तनु थदानी

क्यूँ  घूमते, हो  कर  बड़े , अपना अहम्  ले हाथ में !
पिटते रहें, खुद ही से हम, फंसते खुद ही के घात में !

जब कद बढ़ा, तो दिल हमारा,क्यूँ सिकुड़ छोटा हुआ,
सिर को फंसाओ मत अरे , अब दिल की बात बात में !

हम   रौशनी   में  डूब  के , अंधे  बने , होना  ही  था ,
सब लुट गया , जो था जमा , फिर उम्र वाली रात  में !

ब्यापारियों  की नस्ल में , हम आदतन  ही  ढ़ल  रहें ,
क्यूँ  भूलते , कि खुश थे हम, मासूमियत  की जात में !

होटल  गयें  कभी   नहीं , अच्छा   हुआ  गरीब  थें ,
हमने  तो  लूटा  है  मजा , संग मां  के दाल - भात  में !

मुझको बना मालिक, जहाज़ों का ,भले कागज के ही ,
बचपन मेरे  तू  लौट आ  , किलकारियों  के साथ में !

शनिवार, 21 दिसंबर 2013

tanu Thadani मेरी बिटिया तनु थदानी

तू  मेरी  जिंदगी को  आ  के , मुक्कमल  कर दे !
मेरी बिटिया  मेरी सांसो  में आ,  जीवन भर दे !

सभी  कुछ  है  मेरे  मकान  में , बस  तेरे  सिवा ,
अपनी किलकारियों से आ के ,उसको घर कर दे !

तेरा   वजूद   मेरे   ख्वाब  में   है , रग - रग  में ,
स्वयंम्  को ख्वाब से निकाल के , धरा पे धर दे !

तेरे बाबुल  का जीवन,  बिन तेरे तो , रिक्त सा है ,
मुझे मासूम  छम - छम  से  भरा , मेरा ही घर दे !

तुझे  इक  बार  तो , बाँहों के , झूले  में  झुलाऊं ,
खुदा से  मौत के पहले , यही  मांगु , ये  वर  दे !

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013

tanu thadani उस मौलवी को क्या कहूं तनु थदानी

मस्जिद में हाथ  जोड़ कर,  कुछ बुदबुदाया था !
तिरछी  हुई नजरें सभी , थप्पड़  भी खाया  था !

बेहद  अजीज  वो  था , बेहद  पसंद  थी   खीर  ,
फिर  भी  गया  न  ईद में , उसने  बुलाया   था !

मां  ने  कहा  था  बेटा  वो , गौ- मांस  खाते  हैं ,
छोटा था मैं ,मुझको समझ में ,कुछ न आया था !

 वो  भी  था  मजा  चाहता ,अम्मी  ने किया बंद,
होली  में   रंग   खेलने  को  , छटपटाया     था !

बातों  ही  बातों  में जो मेरा , जिक्र  था  आया ,
मुझको पता  चला  मुझे ,  काफिर  बताया  था !

  वो  मेरे   एतराज  पे , बोला  क्यूँ   दुःखी  हूं ,
उसको तो  मौलवी ने ही ,ये  सब  सिखाया था !

उस मौलवी को क्या कहूं , इक  शब्द की खातिर,
उस  शब्द से यारी  गयी , कुछ भी न भाया था !

नफरत  के  लिये  हम वजह, जो  धर्म को  माने ,
खोजो  ये नाम  हिंदू - मुस्लिम,  कौन  लाया था !

इंसान  हैं , इंसान  बन  के , रह  न  पायें  क्यूँ ?
भगवान  ने  क्या   हिंदू - मुसलमां बनाया था ??

गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

tanu thadani चल दुःख दे दे मुझको अपने तनु थदानी

दुःख जाग रहा गजलों में अब, मैं सोया किस्मत सिरहाने !
दिल ने खुद  पे  ले  ली  बातें , अब क्या होगा मौला जाने !

ये  पीठ  पे  घाव  हुआ  कैसे ,कैसे  किस  पे  इल्जाम  रखुं ?
सब ही  तो हंस के  मिलें गले , कैसे  बोलो अब पहचाने ?

मां तेरी प्यार की  लोरी  सा ,मासूम वो लम्हा  ना मिलता ,
अब  मिलते  हैं  हर  ओर  यहाँ , बस छल के ही ताने -बाने !

हम अपनी अपनी गठरी में , दुःख  लाख लिये फिरते रहते ,
हर दर पे गठरी खोल खोल,  लगते हर इक को दिखलाने !

चल  दुःख  दे  दे मुझको अपने , पर शर्त माननी होगी कि ,
तुझसे   भी  दुःख  न पाये कोई,  चाहे जाने  या अनजाने !

बुधवार, 18 दिसंबर 2013

tanu thadani मैं सूफीयाना हो गया तनु थदानी

कंगाल था , इक नाम से ही ,इक खजाना हो गया !
तुझको  बना  मालिक मैं , बुद्धु से सयाना हो गया !

हाथों  को  उठा  माँगते , सिर  फोड़ते  हर  द्वार पे ,
सब ही तो है फिर ये तो खुद पे ,जुल्म ढाना हो गया !

मैं  मिला  मां  को , मुझे बीबी मिली,  बच्चा मिला ,
सब कह रहे जब तू मिला , तो मैं दीवाना हो गया !

सब  ढुंढ रहे  हैं  तुझे , काशी  से ले अजमेर तक,
अब खुद के भीतर ही गये ,जब इक जमाना हो गया !

जब मैं रहा मैं ही नहीं,फिर दुःख है क्या ओं दर्द क्या?
इस पार से उस पार बस, ये आना -जाना हो गया !

धर्मों की पकड़ से निकल, कोशिश की इंसा होने की
इंसान  ज्यूं  बनता गया , मैं सूफीयाना  हो गया !

तेरी  खुशी  में  गा  रहा  मैं , संग  मेरे  गा  जरा ,  
रोया दुःख में  तु मेरे ,   यूं  सुर  मिलाना हो गया !

सोमवार, 4 नवंबर 2013

tanu thadani ऐ भारत मां

उसे  नेता  क्यूं कहते हो , क्यो  भूले अपने  छालों   को  ?
हमारे  हाथो ही  दे  मारा है  , हमारे  गालों   को  !


यही  कुनबा  है बेशर्मो  का , जिसने  मां  को  ही  लूटा ,
पहन खादी यहाँ सहलाते , लफंगो सा  बालों को !


सलामत हैँ सभी संदर्भ,  जिसकी आड़ ले ले कर,
वो  लेता  छीन  मेरे  भूखे , बच्चो के निवालो  को !

उसे  ठग कहने   वाले , हैं  गलत  ये मैं भी कहता  हूं ,
हैं वो  कातिल कतल करता , हमारे  भोले भालो  को !

समूचे  घर  की सम्पति को वो , घुन  बन के खा  गये ,
कि हम तो  देखते ही  रह  गये , बस  लटके  तालो को !

वो अपनी आत्मा को बेच  के भी , फिर रहें  भूखे ,
वो  बेचेगें  जरूर देखना , अब  अपनी खालों  को !

ऐ भारत मां ! हम ही ने चोर,  संसद मे बिठाये हैं ,
जो  सीना ठोक के अंजाम,  देते  हैं  घोटालों  को !

कि  संसद जब  हमारी भोर  का कानून  इक देगी ,
पियेगें भर के  तब उस भोर में , जीवन  के प्यालों को !

रविवार, 22 सितंबर 2013

tanu thadani तुम भी तो संत हो hey eshwar-3 tum bhi to sant ho हे ईश्वर -3 तनु थदानी

हाँ !  दिल के  कूड़ेदान  से  भी ,छांटता  हूँ  प्रेम !
तू  विष  परोस  तो  बदल  के  ,चाटता   हूँ  प्रेम !

मुझसे  नहीं   डरो  मैं  कुछ  भी , मांगता  नहीं  ,
मैं  तो  हूँ   इक  फ़क़ीर  सदा , बांटता  हूँ   प्रेम  !

तू  खेती  नफरतों  की  भले , कर  के  देख   ले  ,
तेरे   ही  खेत   आ  के  देख , काटता  हूँ   प्रेम  !

जब  गिर  पड़ो  गड्ढ़े  में  तो , मुझको पुकारना ,
मैं   वासना   के  गड्ढ़ों   में  ,पाटता   हूँ    प्रेम  !

बदरंग   दीवारों   को   कभी ,   छोड़ता    नहीं , 
अच्छी   लगे   दीवार  सो  मैं , साटता  हूँ  प्रेम  !

तुम  भी तो  संत हो अगर ,दाढ़ी  नहीं तो  क्या ?
खुल  के  कहो  की  नेक  हूँ औं , बांटता  हूँ प्रेम !

 



सोमवार, 19 अगस्त 2013

tanu thadani हम चुप ही रहते हैं hey eshwar -3तनु थदानी ham chup hi rahte hain हे ईश्वर-3

भली  आदत  थी  वो  मेरी , वो  आँखे  बंद  रखने  की !
सबों से  कट  गया  मैं जब  लगी , आदत  परखने  की !

खफ़ा थे लोग उनकी  शक्ल  जो ,उनको  ही दिखलायी ,
गलत  आदत  थी  वो  मेरी , आईना  साथ  रखने  की !

सदा   सच  बोलना  बेटा , मगर   बेटे  ने   समझाया ,
बुरी  आदत  है  ये  मेरी , यही   इक  बात  बकने  की !

अब  रोयें  या  कहो  हँस दे ,हमें  भत्ता  तो मिलता है ,
हमें   सरकार  ने   दी   नौकरी , है   धूल  फँकने  की !

या  कोई  मार  दे  या  गाली  दे , हम चुप  ही रहते  हैं ,
कहानी   है  पुरानी   जोश  औं , जज्बे   फड़कने  की !

हमारा  दोष  ही  कह  लो ,कि  हम  विश्वास  हैं करते ,
छकाते  सुख  हमें  क्यूँ  कि,हमें आदत  है छकने की !

रविवार, 18 अगस्त 2013

tanu thadani यही सच है hey eshwar -3 तनु थदानी yahi sach hai हे ईश्वर -3

कहीं विश्वास है बिकता , कहीं  इज्ज़त भी बिकती  है !
हमारी  ये  सदी  तो  पूरा  , इक  बाज़ार   दिखती   है !

कहीं  जो  आग  लग  जाये , हमारे  दिल  झुलसते  हैं ,
उसी  पे   देख   मेरे  रहनुमा  की ,  रोटी   सिंकती   है !

यही  सच  है  तरलता  खो  गई , है   भावनाओं   की ,
सभी कुछ  हो गयें पत्थर ,कोई  खुशबू  न  टिकती  है !

यहाँ  सब  ठीक   है  बेटा , नहीं   चिंता  कोई   करना ,
नहीं माँ आजकल की , आजकल  चिट्ठी  में लिखती है !
------------- तनु थदानी



रविवार, 11 अगस्त 2013

तुमको नहीं पता है ,चुपचाप रोती माँ है hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

रूठे  हुए  हैं  हमसे ,खुशियों  के ताने- बाने !
परदेस  में  न  मिलते ,परिवार  के  खजाने !

जीने के लिए  तुमने,जो अपनी जमीं छोड़ी ,
ज़िंदा  नहीं तू  बिलकुल ,साँसे  तो हैं बहाने !

छाया  तो पकड़ लेगा,कोई गणित  लगा के , 
खुद  को  पकड़ने में ही,लग जायेगें ज़माने ! 

बहनों का मीठा  ताना,भाई का रूठ  जाना ,
वो  जा  रहें  हैं  देखो , यादों  में ही समाने !

कितने  भी  तर्क गढ़ ले ,निष्कर्ष तो यही है ,
घर  में  थी दाल-रोटी,बाहर भी वो ही दाने ! 


तुमको नहीं पता   है ,चुपचाप  रोती माँ  है , 
दुःख ढेर सारे होंगे ,क्या बोला कभी माँ  ने ? 

समझे थे जिसको दौलत,ढूंढा शहर-शहर में ,
क़दमों में मिले माँ के ,जीवन के पल सुहाने ! 

बिटिया का चंचल बचपन,न हाट में मिलेगा ,
लौटेगा जब  तलक तू ,वो  भूलेगी  तुतलाने !

जाना  तो कब्र  तक  है ,दौड़ो यहाँ-वहां तुम,
आएगी अकल कब तक,अब ये तो राम जाने ! 






    
    

  

शनिवार, 10 अगस्त 2013

tanu thadani ka vinmrh aagrh तनु थदानी का विनम्र आग्रह ------

तनु थदानी का विनम्र  आग्रह -----



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बुधवार, 7 अगस्त 2013

अवाक से हम रह गयें hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }awaak se ham rah gayen

हो सीमा या हो खेत  अब ,मरने का  समां हो गया  !
क्यूँ  भारतीयता  का  हमें , अवैध  गुमां  हो  गया  ?

निराश   हूँ   यूँ   कि   यहाँ  ,  इक   भारतीय  नहीं  ,
सिख - मुसलमा -हिंदू  जैसा , खूब  जमा  हो  गया  !

अब   आदमी   के  बारे   में  , बोले  तो   क्या  बोले ,
जब  राम  हिन्दू   हो  गया ,ख़ुदा  मुसलमा हो गया !

कुत्तों   से   सीखा   भौंकना  ,  सीखी   नहीं   वफ़ा  ,
वो  देश  के  हैं  नेता  जी ,सो उनको  क्षमा  हो  गया !

औकात   की   तो   बात   न  , करना   कभी  पगले ,
भारत  समूचा  आजकल ,इंडिया  में  रमा  हो  गया !

रुपया   नहीं   गिरता  कभी , गिरता   हमारा  मोल  ,
न  पूछ  यहाँ  दर्द  की  , कैंसर  को  दमा  हो  गया !

संसद   हमारी   भर  गयी  , गिरगिट   से  अचानक  ,
अवाक से  हम  रह  गयें ,सब  कुछ  यूँ  थमा हो गया !   

सोमवार, 5 अगस्त 2013

मिलो इक बार, hey eshwar-3 (tanu thadani) milo ik baar, हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

हमें  ना  पूछना  कि  हँस  नहीं , क्यूँ  पा  रहें  हैं !
हमें   गुजरे   जमाने  याद ,  बरबस   आ  रहें  हैं ! 

किसी  से  मिल के बिछड़ने  से  मिला खालीपन ,
तमाम  जश्न  उसे  क्यूँ  नहीं,  भर   पा  रहें   हैं  ?

जिन्होंने बस  किया व्यापार, हर इक  सूरते-हाल,
वो  हमको प्यार  वाला फ़लसफ़ा,  समझा रहें हैं !  

यूँ  की  तौहीन, जिस्मो  से  हमारा , इश्क तौला ,
हमारे  इश्क  पे  क्यूँ  यूँ  क़हर ,  बरपा   रहें   हैं ? 

मिलो इक बार मकसद हो भले ,बिछड़न ही सही ,  
कतल  उस ख्वाब का कर डाल ,जो  घबड़ा रहें हैं !

कभी  हिंदू  मुसलमा  बन  के , फिरे  थे  यहाँ  पे  ,
तुम्हारे  इश्क   में   इंसान   बनते   जा  रहें   हैं  !

तू  मस्जिद जा,मेरे लिये तो ख़ुदा, वो  ही है  बस ,
मेरे  महबूब  की  अच्छी  ख़बर ,जो  ला   रहें  हैं !

कभी वो दिन भी न आये , कि  हंसू  बिन  तेरे  मैं ,
जमीं  पे  मछलियों   सा  देख ,  छटपटा  रहें   हैं !


शनिवार, 27 जुलाई 2013

हमारा हर मिलन त्योहार है औं तीज है hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }


तुम्हारी  फ़िक्र  तो  ,जीने  की  इक  तमीज़  है  !
तुम्हारा  जिक्र  भी  ,साँसों सी ही  इक चीज़  है !

तु  धागा  प्रेम का बन , मुझमे  सिली  जाती  हो ,
मेरा  जीवन  तो महज़ ,  इक  फटी  कमीज़   है !

कई रूतबों  को  पार  कर  के , तेरे  पास  हूँ   मैं ,
तू  मेरा लक्ष्य  थी  और , अब  मेरी  तहजीब  है !

करोड़ो  बार  कत्ल  हो  के  भी , हम  मुस्कुराये ,
हमारे   रक्त   में  , उल्लास   वाले   बीज    हैं  ! 

हमारा  प्रेम  जो  रिश्ते  का  है ,  मुहताज़  नहीं ,
हमारा  हर  मिलन  त्योहार है  , औं   तीज   है !

शुक्रवार, 26 जुलाई 2013

प्रेम - प्रेम हम चिल्लाते हैं -hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }prem prem ham chillate hain


लिपट मैं रोया ,रात  समूची ,थी वो  प्रेम  के शव की काया !
विश्वासों  के  सन्नाटे  में  , धोखे  ने   था  मार   गिराया  !

प्रेम - प्रेम  हम  चिल्लाते  हैं , खुद  से  भी तो  प्रेम  नहीं  है , 
पूरा जीवन  बिता  दिया यूँ , बहरों  बीच  ज्यों गाना  गाया !

चुम्बन  से आलिंगन  तक तो ,बस  गर्मी थी  साँसों  की ही ,
बरसों  उलझा रहा इसी  में ,प्रेम कहाँ  था  समझ ना पाया !

लगता  तो वो  साथ था मेरे ,मरा अचानक  क्यूँ  कर  कैसे 
मंडप  से  भजनों तक पूछा , प्रेम  ने आखिर क्या था खाया ? 

शाम  के  आँगन  पसरी  बूढ़ी , हड्डी  के  ढाँचे  ने  रो  कर ,
कहा सफ़र हो गया ख़तम  अब ,कर दे ईश्वर प्रेम की छाया !


शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

समझ में आया हमको देर से hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }samjh me aaya hamko der se

हमें  अफ़सोस  है  कि क्यूँ  भला , हमने ये  कर डाला !
जिसे  था  सींचा  उम्र  भर ,वो  पौधा  था  ज़हर वाला  ! 

हमारे  ऐश  के  तो   सब  तरीके  ,   हो  गयें  बे- शर्म  ,
ख़बर  है खून  से  अपने  ही उसने , मुंह किया  काला !

हमारी  इस  सदी  ने  जिस्म  की , आयु  बढ़ा  तो  दी  ,
मगर  जो  आत्मा  इसमें  थी ,उसको  मार  ही  डाला  !

उसे  तो  बस  हड्पनी  थी  जमीं , मंदिर  के  नाम   पे  ,
उसे  क्यूँ  दीखता  कि  ठीक  उसके , नीचे  है   नाला  !

उसे   रोज़ी  कमानी  थी ,  तभी   मंदिर  बनाया   है ,
करिश्मा  देखिये की  उसने इक , भगवान  भी  पाला !

हमें  नंगे  दिलों  से  दौड़  कर , जिनसे  लिपटना था ,
झिझक  के  लौट  आये ,मन्दिरों  में  देख  के  ताला !

समझ  में आया  हमको  देर  से , कि  पास  है  मेरे ,
रहा  मैं  ढूंढ़ता  जिसको , लिये  दीपक लिये  माला !






   

रविवार, 19 मई 2013

मिला हमको वही आखिर hey eshwar-3 (tanu thadani) mila hamko wahi aakhir हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

मेरे  तकिये  पे  मेरा  हाल  कल ,लिख  के  जो  मैं  सोया !
मैं  तो  सोया  रहा  बुत  सा ,वो  तकिया  रात  भर  रोया !

किसी  का   जिस्म  है  मैला  ,  किसी  की  आत्मा  मैली ,
मेरे  मौला, ये  मैलेपन  में  हमने , खुद  को  क्यूँ   खोया ! 

किया  खिलवाड़  जो  खुद  से , छिपाये  छिप  नहीं  पाया ,
गवाही   दाग   ने   दे   दी  , दुप्पट्टा   लाख   था    धोया  ! 

हजारो  छल  किये  यूँ  कि  , हमें  कुछ  और  मिल  जाये ,
मिला  हमको  वही   आखिर , जो  हमने  बीज  था  बोया !

नई  पीढ़ी  ने  हासिल  कर  ली  दुनियां ,इक  चमकती सी ,
गई  है  भूल  कि  एवज  में  उसने , क्या- क्या  है   खोया ! 

सोमवार, 13 मई 2013

tanu thadani तनु थदानी. जो उसकी बात वाजिब थी नहीं

हमें मिलता है बस उतना,वो जितना छोड़ देता है !
प्रजा   के  तंत्र   में  नेता  , प्रजा  को  तोड़  देता  है  !

हमीं  ने चुन के  भेजा सो , हमें चुपचाप  है  सुनना ,
वो  खुल्लेआम चुन-चुन  गालियाँ , बेजोड़  देता  है !  

हम  सीधी  बात  जब  उससे,हमारी भूख की करते ,
हमें  सीधे   ही  वो  आतंक  से   ही , जोड़  देता  है !

हमारी  बात  संसद -सत्र  में , खुल    नहीं  पाती ,
हमारी  बात को   इतने  तहों   तक , मोड़  देता  है ! 

जो उसकी बात वाजिब थी नहीं,वो इसलिये अक्सर ,
झगड़ता,कुछ  नहीं  सुनता,महज  इक  शोर  देता  है !

हमारा  दर्द  इक   सा  है  मगर , वो  डाक्टर  देखो , 
उसे  कुछ  और  देता  है  , मुझे  कुछ  और  देता  है !

बुतों  को  तोड़  के भी वो , मुसलमां  बन नहीं  पाया ,
वो  काफिर  बात  में  ईमान  को  जो , छोड़  देता  है !    



शुक्रवार, 10 मई 2013

जो तुमसे प्यार हूँ करता hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

तेरी मुस्कान  जो  मेरे  लिये  है , गीत  इक  छेड़े !
मधुर  संगीत  में  ढल ,मैं  रहूँगा ,जिस्म  में तेरे !

तुम्हे  गर  मैं  हटा  दूंगा ,जो  मेरी  जिंदगी  से तो ,
बचेगा  क्या  हमारे  पास , सिवाय  जिस्म के मेरे !

जो तुमसे प्यार हूँ करता,तेरी कमजोरियों  के संग ,
तभी  मंजूर  हूँ  करता  सभी , दुःख - दर्द  भी  तेरे !

सभी  कुछ  लूट जायेगा,ये वक्त ,तुमसे  सब तेरा,
कभी  ना   लूट  पायेगा , वो   मेरे , प्यार  के  घेरे  ! 

मंगलवार, 7 मई 2013

न बनाना बुद्ध खुद को hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी },

प्रार्थनायें  हैं  जरुरी ,  काम  लेकिन ना  करें  क्यूँ  ? 
उम्र  वाली  बाल्टियां  ,हम  निरर्थक  यूँ  भरें  क्यूँ  ?

न  बनाना  बुद्ध  खुद  को ,घर  कभी  न  छोड़ना तू ,
ध्यान  में असंख्य गढ्ढे ,ये बताओ गिर  पड़े  क्यूँ ?

हारना  व  जीतना  तो , जिन्दगी   के  रंग  हैं  जी ,
रह गया अफ़सोस ये की,हारे आखिर बिन लड़े क्यूँ ? 

प्यार  का सन्देश ले कर , मैं  यूँ  ही  फिरता रहा कि ,
मौत निश्चित है तो आखिर,प्यार ही से ना मरे क्यूँ ?  







शनिवार, 4 मई 2013

चलो जगाओ खुद कोtanu thadaniहे ईश्वर -3 तनु थदानी





ग़ज़ल 
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हमने  सारा  शहर  बसाया ,बिल्डिंग - नाले - रोड  बनायें  !
मगर  प्रश्न  ये  रहा  अधूरा , आम  आदमी  कैसे   खाये  ? 

जंगल ने दी कुर्बानी , फिर  हम  क्यूँ   जंगली  बन बैठे  हैं ,
कॉलोनी  ने  खेत  चबायें  , कैसे  शहर  की   भूख  मिटायें ?

सीमाओं  की हलचल  से  है , हमें  भला  क्या  लेना - देना ,
हमें  हमारी  नींद  है  प्यारी , बेशक  कोई  आये-  जाये  !

किस्मत  से मानव तन पाया,किस्मत  से ये देश भी पाया ,
सब  पा जाते किस्मत से फिर,मेहनत से क्यूँ काम  बनायें ?

कहते  हैं  भगवान  मिलेगा , इसीलिये  हर गली-गली  में ,
कोई   घंटा   बजा  रहा  है , कोई  ख़ुदा - ख़ुदा  चिल्लाये  !

ज्यों ये घोषित किया की कुछ भी ,बिना परिश्रम नहीं मिलेगा ,
धर्म   के  ठेकेदारों  को ये , फूटी  आँख  सा जरा  ना  भाये !

चलो जगाओ खुद को ,आँखे , खोल  के  देखो  सपने  सारे ,
फल  हेतु  ही  कार्य  को  करना , गीता  का  अध्याय  बनायें !











गुरुवार, 2 मई 2013

सचमुच हम शर्मिंदा हैं hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

खुश  ना  होना  जश्न  देख  कर,अक्सर  मौका  आता  है  !
मेरे  देश  में  गम  अक्सर  यूँ   , भेष  बदल   भरमाता  है !

बहरूपियों  की  एक  सल्तनत , राज  करे  हम लोगों  पे ,
मीठी  बातें   करता  है  फिर , अपनी   थूक  चटाता  है !

सचमुच  हम  शर्मिंदा  हैं , ऐ  सरबजीत  ये  सच  भी है ,
कि  राजनीति  का मारा  पानी ,मांग  भी तो ना पाता  है !

जो  संसद  को  चकला  बोला , सीधा  जेल  में  जायेगा ,
बोल  के  पगला  पगले  को क्यूँ ,मुहँ  अपना नुचवाता  है !

मेरे  प्यारे  भारत  का अब , और  बुरा  भी  क्या  होगा ?
संविधान  की  आड़ में  कुत्ता , शेरों  को नचवाता  है !

हे  ईश्वर ! अब  इंसानों  को  ,तू  ही आ  कर  ये  समझा ,
विदा  जो  होगा  दुनियां से तब , ले  कर क्या जा पाता  है ?? 

  

सोमवार, 29 अप्रैल 2013

तू रब है मैं तेरा आशिक hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

तू  रब  है  मैं  तेरा  आशिक
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हाँ ! तुम को पा ही लेता मैं ,जो तुम में ,खो अगर जाता  !
तुम्हे  पाने  का  सपना  टूटता , जो  सो  अगर  जाता  !

तेरी  मदमस्त  प्रकृति  भी  तब,  खुशहाल  हो  पाती ,
हमारे  दिल  में  संतुष्टि  का  पौधा,  बो  अगर  पाता ! 

मुझे  भी  खुश  कोई  करता  , कभी  मैं  भी  ख़ुशी  पाता ,
किसी  के  वास्ते   थोड़ी  ख़ुशी  मैं , जो  अगर  लाता  ! 

मेरे   दुःख  में  अकेला  मैं  था , कोई  साथ   तो  रोता ,
किसी  के  वास्ते  मैं  भी  कभी जो ,रो  अगर  पाता  !

तू  रब  है , मैं  तेरा  आशिक  , तू  ऐसा  चित्रकार  है  ,
तेरी  दुनियाँ   सा  मैं  भी  खूबसूरत , हो  अगर  पाता  !

बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

tanu thadani तनु थदानी क्यूँ सूख गया यूं अचानक

साबित  किया  इक  सा  हमें , इस  लाल  रक्त ने!
हम  हैं अलग  फिर क्यूँ  कहा ,ईश्वर  के भक्त  ने?

अब्बा   की  मार   खा  रोया  ,  मासूम   वो बच्चा,
अल्लाह  की  फोटो  क्यूँ  बनाई ,उस  कमबख्त  ने !

उसने   भी  मार   खायी  थी ,  लक्ष्मी   बना  अंधी ,
तड़पाया   रोटी  के  लिये , जब   दोनों   वक्त  ने  !

मुल्ले   हो  या   पंडे   सभी , इक  थैली  के   चट्टे ,
चुगली  की उनकी ,उन्ही  के ,आसन  व  तख्त  ने !

क्यूँ   सूख  गया  यूं  अचानक  ,मैं  तेरे  भीतर  ?
हो   कर दुखी  मुझसे  कहा ,  दिल  के  दरख्त  ने !



मंगलवार, 26 फ़रवरी 2013

चलो हैं दोस्ती सिलते hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

चला जो  दौर  बिकने  का , न  सोचा  पीछा  ना  आगा !
बिके  सब  दोस्त  ना जाने ,वो  कैसा  हाट   था  लागा  !

बुरा  था  वक्त  जिसने  चिथड़े , कर  डाले  रिश्तों  के ,

चलो   हैं  दोस्ती   सिलते ,  लाओ  यकीन  का  धागा  !

जो  कर  दी  मेरे  दिल पे  छापेमारी , मेरे   ही सिर  ने ,

खजाना  दोस्ती   का  था , जिसे  वो  लूट  कर  भागा  !

बिगाड़ा  है  हमारा  कल , हमीं  ने  खुद  यहाँ  लेकिन  ,

हमारी  छत  पे  सदियों  से , रहा   बदनाम  है  कागा  !

वो हमसे प्यार है करता hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी },

कोई   भी  बुत  मेरे  साहेब  को , ना  साकार  कर   पाये  !
मुझे    तो  जर्रे- जर्रे   में   , मेरा  साहेब   नजर    आये  !

न  हमसे   पूछ  कैसे   खुद को   ही , हम  नोंच  खाते  हैं ,
धरम  का  मांस  हम में   भूख , आदम  वाली  ललचाये !

बना  मंदिर , बना   मस्जिद ,जो  करते   चापलूसी  हम ,
मेरा  साहेब  हमारी  अक्ल  पे , हँस - हँस   के मुस्काये !

भला   कोई  पिता  क्यूँ  चाहेगा  कि  , उसका  ही  बच्चा ,
करम  को  छोड़ - छाड़  कर , पिता  के  गुण  भला   गाये  !

किया   जीवन  को  ही  पैदा  ,मगर  मस्ती    नहीं  पायी ,
ना अब तक सम  हुये  हम सब ,ना  खुद को भोग ही पाये !

मेरे  साहेब  ने  हम  सबको  बताओ , क्यूँ   यहाँ  भेजा  ?
भला  क्या  इसलिये  कि सारी  बगिया  ख़ाक  कर  जायें !

वो  हमसे  प्यार  है  करता ,वो  सब तक  आ  नहीं  पाता , 
तभी  तो  माँ  बनाई  ताकि , हर  इक  तक  पहुँच  पाये  !





बुधवार, 30 जनवरी 2013

आखिर क्यूँ ? {हे ईश्वर -3 } तनु थदानी tanu thadani


शातिर  दिमाग  से  खेलते  हैं ,
नादान   दिल  से  खेलते   हैं ,
बेवकूफ  शरीर  से  खेलते  हैं ,
हम  खुद  के  भीतर  भी
इन  तीनो  स्थितियों  को
अपनी  मृत्यु  तक  झेलते  है !


हम  नहीं  हैं  किसी  भी  पशु  के  विकास - यात्रा  के  यात्री
हमने  खुद  के  भीतर   पशुता का  विकास  किया  है !
बेहतर हैं  पशु  हमसे
कि स्पष्ट  है  उनका लक्ष्य -भोजन ,
मगर  हमारे  लक्ष्य तक  नहीं  हैं  निश्चित !


हम  कपड़े  ओढ़  कर  शर्मिन्दा  हैं ,
मृत  भावनाओं  के  साथ  ज़िंदा  हैं ,
भीड़  मे  अकेलेपन  के  साथ  हैं ,
अकेलेपन  में  यादों  से  खेलते  हैं !
मात्र  साँसों  से  दोस्ती  के  लिये ,
रोज नया  आवरण , खुद  के  ऊपर  बेलते  हैं !


हे  ईश्वर  !
क्यूँ  है  हमारी  जीवन - यात्रा   अनिश्चित  ?
क्यूँ   हमारे  साथ   चलती  एक  निन्दा  है ?
क्यूँ  हैं  बनाते खुद  के  भीतर  खाई  अहंकार  की ?
आखिर   क्यूँ   खुद  ही  को  उसके  भीतर  ढकेलते  हैं ??