गुरुवार, 1 नवंबर 2012

जब साजन रूठ जाता है hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }


हमारी  हो  ना  हो  मर्जी  , बहुत  कुछ   छूट   जाता है  !
हमारी   उम्र - शक्ल  को  ,  समय  ही   लूट  जाता  है  !


तुम्हारी   ज़िद   है   ओखली  ,  अहंकार    है   मूसल   ,
तुम्हारे  सामने  जो  तुमको , अक्सर  कूट  जाता  है  !


कई  बरसों  में  जतनों  से ,जो रिश्ता  ठोस  है बनता ,
वही   रिश्ता  महज   इक  बात  से  ही  टूट  जाता  है !


गले  मिलने  में  गंर संकोच  हो , तो  मुस्कुरा   देना , 
महज  मुस्कान  से शिकवा- गिला सब  फूट जाता है !


कहीं  मेहंदी  औ  चंदा  से   भी , करवाचौथ  है  होता ?
सभी व्रत  व्यर्थ  हैं  होते ,  जब साजन  रूठ  जाता है !
  




2 टिप्‍पणियां:

  1. तुम्हारी ज़िद है ओखली , अहंकार है मूसल ,
    तुम्हारे सामने जो तुमको , अक्सर कूट जाता है !

    बहुत खूब....

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